नौ लाख चांदी के सिक्कों से बना था बिहार का नौलखा महल

इतिहास

मधुबनी जिले के राजनगर में इस पैलेस का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था। 1934 में आए भूकम्प के कारण इस पैलेस को काफी क्षति पहुंची थी। उसके बाद इसका निर्माण नहीं हो पाया।

इसके अलावा कमला नदी के पास मां काली मंदिर और मां दुर्गा को समर्पित राजनगर पैलेस यहां का मुख्य पर्यटक स्थल है। रहस्य और रोमांच को अपने आगोश में समेटे इस राजनगर महल की स्थापना दरभंगा राज के 21वें महाराज रामेश्वर सिंह ने की थी।

वो तन्त्र विद्या में सिद्धहस्त थे और उन्होंने इसी विधा के सहारे राजनगर में देवी-देवताओं के मन्दिरों से अटे पड़े इस परिसर का निर्माण 19वीं शताब्दी के अंत में कराया था।

परिसर में स्थित सभी मंदिरों में तन्त्र की देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। इनकी पूजा दक्षिण दिशा में होती है क्योंकि सभी मंदिर दक्षिणामुखी है। इसके अलावा यहां संगमरमर से बनाया गया काली मंदिर भी बड़े आकर्षण का केंद्र है।

मंदिर के अंदर मां काली की भव्य मूर्ति है जो काले पत्थरों से निर्मित है। साथ ही मन्दिर के पास अष्टधातु निर्मित एक विशाल घण्टा भी है। परिसर में मां काली के अलावा मां दुर्गा, मां कामख्या और मां गिरजा के मन्दिर है

 

परिसर के बाहर एक महादेव मन्दिर भी है। परिसर में जलक्रीड़ा के लिए तालाब और राजकाज चलाने के लिए महल के सटे सचिवालय का भी निर्माण भी कराया गया था।

इसमें वर्तमान समय में विशेश्वर सिंह जनता महाविद्यालय चल रहा है। इसमें चार हाथियों के खंभे वाला सिंह द्वार आज भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

 

इस महल के सन्दर्भ में कहा जाता है कि दरभंगा राज के महराज रामेश्वर सिंह ने उस वक्त नौ लाख चांदी के सिक्के से नौलखा महल का निर्माण कराया था और इसी कारण इसे नौलखा नाम दिया गया।

राजा की चाहत थी कि दरभंगा राज उनके शासनकाल में राजनगर से चले। मगर ऐसा नहीं हो सका। इस महल के साथ विडम्बना यह रही कि 1934 के भूकम्प में यह दरक गया

इसके बाद दरभंगा राज के 22वें महाराज कामेश्वर सिंह ने पुनः इसे संवारा मगर कुदरत को यह भी मंजूर नहीं हुआ। 1988 में यह महल फिर से ध्वस्त हो गया।

स्थापत्य कला के बेहतरीन नमूने में से एक इस महल और अपने स्वर्णिम अतीत के रहस्यों को समेटे इस परिसर को आज भी किसी ऐसे की तलाश है जो इसका उद्धार कर सके।
 

बता दें कि यहां कई क्षेत्रीय फिल्मों की शूटिंग होती रहती है जिस कारण यह परिसर रुपहले पर्दे पर भी कभी-कभार दिख जाया करता है।

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