station madhubani painting

एक सौ कलाकार संवारने में लगे हैं मधुबनी पेंटिंग से रेलवे स्टेशन, अब जल्द ही सांस्कृतिक झलक मिलेगी आने वालों को

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विश्वप्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग्स से पूरी तरह सुसज्जित होकर शीघ्र ही निखरने वाला है मधुबनी का रेलवे स्टेशन। इन दिनों स्टेशन को पूरी तरह मिथिला पेंटिंग्स से संवारा जा रहा है। अब यहां उतरने वाले यात्रियों को चहुंओर बनी विविध कलाकृतियों को देख यहां की प्राचीन कला- संस्कृति से रूबरू होने का सौभाग्य मिलेगा।

 

बता दें कि बीते दो अक्तूबर को पूर्व-रेलवे समस्तीपुर के मंडल रेल प्रबंधक आरके जैन ने यहां रेलवे स्टेशन परिसर की दीवालों पर मधुबनी पेटिंग बनाने के कार्य का विधिवत शुभारंभ किया था। अब एक सौ से अधिक कलाकार इसमें जुटे हैं। कलाकारों को पेंट सहित अन्य संसाधन रेलवे द्वारा मुहैया कराए जा रहे हैं।

तेजी से चल रहे पेंटिंग्स कार्य पूरा होने के साथ ही शीघ्र ही मधुबनी पेंटिंग्स का मॉडल बन चुके स्टेशन का लोकार्पण किया जाएगा। पेंटिंग्स कार्य पूरा होने के बाद देश का यह पहला स्टेशन होगा जो पूरी तरह मिथिला पेंटिंग्स से सजा होगा।

 

मधुबनी पेंटिंग्स का इतिहास काफी पुराना रहा है। मिथिलांचल में मांगलिक कार्यों के मौकों पर घर-आंगन को पेंटिंग्स के माध्यम से सजाने की प्राचीन परम्परा रही है। यह पेंटिंग्स दुनिया भर में प्रसिद्ध होती चली गई। इसके कद्रदानों की संख्या दिनानुदिन देश ही नहीं विश्व स्तर पर बढ़ती चली गई।

 

इस कला के प्रचार-प्रसार में सत्तर के दशक में कला के पारखी भास्कर कुलकर्णी व पूर्व केन्द्रीय रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र का अहम योगदान रहा है। मिथिला पेंटिंग्स की बढ़ती ख्याति के बीच करीब छह दशक में इस पेंटिंग्स के यहां के पांच कलाकार पद्मश्री पुरस्कार हासिल करने में कामयाब रही हैं। इसी क्रम में जिले में मिथिला पेंटिंग्स के कलाकारों की संख्या बढ़ती चली गई। जिले के 10 हजार से अधिक इसके कलाकार पेंटिंग्स के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

station madhubani painting

यहां रेलवे स्टेशन को पूरी तरह मधुबनी पेंटिंग्स से संवरने के बाद इसके विश्व का सबसे बड़ा मधुबनी पेंटिंग्स से सुसज्जित क्षेत्र होने का अनुमान लगया जा रहा है। डीआरएम ने बताया कि प्लेटफार्म सहित स्टेशन परिसर के लगभग आधा किलोमीटर के रेडियस में तकरीबन आठ हजार वर्ग फुट में विभिन्न विषयें पर कलाकृतियां बनाए जाने का लक्ष्य है।

 

रेलवे स्टेशन पर सौ से अधिक कालाकार अलग-अलग टीम बनाकर सीता जन्म, राम-सीता वाटिका मिलन, धनुष भंग, जयमाल, कृष्ण लीला, माखन चोरी, कलिया मर्दन, कृष्ण रास, राधा-कृष्ण प्रेमालाप, विद्यापति, ग्रामीण जीवन, मिथिला के लोक नृत्य व त्योहार सहित तकरीबन चार दर्जन विषयों पर अपनी कलाकृतियां उकेर रहे हैं।

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‘मधुबनी रेलवे स्टेशन पर बनाई जा रही पेंटिंग्स दुनिया भर के लिए अनोखी होगी। मेरी संस्था के कलाकार सहित अन्य कलाकार यहां अपनी कलाकृतियां उकेरने को लेकर काफी उत्साहित हैं।’
– षष्ठीनाथ झा, सचिव, ग्राम विकास परिषद

‘मिथिला पेंटिंग्स से सजा मधुबनी रेलवे स्टेशन देश का पहला अद्भु त स्टेशन होगा। यहां के कलाकार बगैर पारश्रमिक के अपनी कला का बेजोड़ नमूना रेलवे स्टेशन पर उकेर रहे हैं। पेंटिंग्स कार्य पूरा होने के बाद नये रंग-रूप वाले स्टेशन का लोकार्पण किया जाएगा। लोकार्पण की तिथि अभी तय नहीं हो सकी है।’
– आरके जैन, डीआरएम, पूर्व मध्य रेलवे समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक

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