शुरू हो गया मलमास, भूल कर न करें यह काम

राष्ट्रीय खबरें

पटना: मलमास आरंभ हो गया है। आधुनिक जीवनशैली ने हमें अपने धर्म से इतना दूर कर दिया है कि धार्मिक ग्रंथों में लिखी बाते हम भूल चुके हैं इसके चलते लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। परिवार में तनाव, आर्थिक संकट, मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलनी, पति-पत्नी में मतभेद, बच्चों का उज्जवल भविष्य यह सब प्रभावित हो रहा है इसकी एक बड़ी वजह सही समय पर गलत काम करना भी होता है। हिन्दू धर्म में अधिक मास को बड़ा ही पवित्र माना जाता है लेकिन जानकारी नहीं होने के चलते हम अधिम मास में वह काम कर जाते हैं जिसके चलते हमें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है।

जानिए क्यों प्रत्यके तीन साल में एक बार आता है अधिक मास तीन में एक बार अधिक मास आता है। पंचांग की गणना को माने तो एक सौर वर्ष में 35 दिन के साथ 15 घटी, 31 पल व 30 विपल होते हैं जबकि चन्द्र वर्ष में 354 दिन , 22 घटी, 1 पल व 23 विपल होते हैं। सूर्य व चन्द्र वर्षों की तुलना की जाये तो इसमे 10 दिन, 53 घटी, 30पल व सात विफल का अंतर होता है। यह अंतर प्रत्यके वर्ष में होता है इस तरह तीन वर्ष के अंतर को निकाला जाये तो यह लगभग एक माह हो जाता है। इसी अंतर को कम करने के लिए अधिक मास पड़ता है ताकि दोनों अंतर खत्म हो जाये।

बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेगा सूर्य, 13 जून तक रहेगा मलमास बृहस्पति की राशि मीन में सूर्य प्रवेश करने जा रहा है इसके साथ ही मलमास आरंभ हो जाता है। मलमास 16 मई से आरंभ होकर 13 जून तक चलेगा। मलमास में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से नुकसान हो सकता है। 13 जून के बाद सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर जायेगा। इसके बाद सभी तरह के मांगलिक कार्य होने लगेंगे। मलमास को पुरूषोत्तम मास व अधिकमास के नाम से जाना जाता है। मलमास का स्वामी भगवान विष्णु का माना जाता है। भगवान विष्णु का एक नाम पुरूषोत्तम भी है।

मलमास की यह पौराणिक कहानी से पता चलेगा इस मास का महत्व दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था इससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी से हिरणयकश्यप से वर मांगने को कहा था। हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगा था यह वरदान किसी को नहीं दिया जा सकता है इसलिए ब्रह्मा जी ने अन्य वर मांगने को कहा था इस पर हिरण्यकश्यप ने वर मांगा की कोई नर या नारी, पशु व देवता, असुर उसे मार न सके। साल के १२ माह में उसकी मृत्यु न हो। हिरण्यकश्यप ने कहा कि जब उसकी मौत हो तो उस समय न दिन हो न रात और ने ही किसी अस्त्र व शस्त्र से वह मारा जाये। ब्रह्मा जी ने हिरण्यकश्यप को यह वरदान दे दिया था इसके बाद हिरण्यकश्यप खुद को अमर समझने लगा था इसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था खास बात यह है कि जिस समय हिरण्यकश्यप का वध हुआ था उस समय मलमास चल रहा था इसका मतलब साल के ३६५ दिन से अधिक था।

मलमास में भूल कर न करें यह काम मलमास में भूल कर यह काम नहीं करना चाहिए। मांगलिक कार्य, शादी विवाह, गृह प्रवेश, नये घर का निर्माण शुरू करना, नया व्यवसाय आदि करने से बचना चाहिए। मलमास में सात्विक भोजन पर ध्यान देना चाहिए। मांस व मंदिरा का प्रयोग से बचना चाहिए। नहीं तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इन कार्य से मलमास में होगा लाभ, मलमास में प्रतिदिन सुबह उठ कर नित्य कार्य से निवृत्त होकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की अराधना करने से बहुत लाभ होगा। गरीबों को दान करने से बड़ा लाभ होता है। इस माह में प्रतिदिन भागवत कथा को श्रवण करने से अभय फल की प्राप्ति होती है। पूजा पाठ के साथ तीर्थ यात्रा का भी बड़ा महत्व है। नेपाल देश की गेरिका नदी स्नानख् नवाह्न परायण आदि करने से भी बड़ा लाभ मिलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.