सोनपुर मेला में कभी बिकता था सबकुछ, महिलाओं से लेकर पुरुषों तक की लगती थी बोली

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पटना: पटना से 25 किमी दूर सोनपुर में लगने वाले एशिया के सबसे बड़े मेले के लिए एक बात बड़ी मशहूर है कि एक दौर में यहां सबकुछ बिकता था। सबकुछ का मतलब सच में सबकुछ से ही है। हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर शुरू होने वाला सोनपुर मेला नवंबर से दिसंबर तक चलता है। ये मेला सोनपुर से हाजीपुर में नदी किनारे कई किलोमीटर लंबा होता है। मेले की खास बातों में शामिल यहां होने वाला डांस भी है। यहां लड़कियां का झुंड दर्शकों का मनोरंजन करता है। इसमें काफी भीड़ जुटती है। वैसे तो सरकार ने हाथियों की बिक्री पर बैन लगा रखा है लेकिन फिर भी ये मेला हाथी मेला के नाम से भी फेमस है।

गंगा स्नान के साथ शुरू होने वाला सोनपुर मेला एक महीने के करीब चलता है। पहले आधिकारिक तौर पर मेला सिर्फ 15 दिनों का होता था। लेकिन तब भी 20 से 30 दिनों तक चलता रहता था। वैसे तो हाथी पालने का शौक ख़त्म सा होता जा रहा है लेकिन मेले में अभी भी हर साल कई हाथी बिकते हैं। इसके अलावा गाय, बैल, भैंस और ऊंट की भी बिक्री होती है।

चिड़ियों के लिए भी अलग से चिड़िया बाजार है। मेला खत्म होने के बाद भी चिड़िया बाजार साल भर के लिए लगा रहता है। सोनपुर मेला उसी जगह पर लगता है जहां कभी गज (हाथी विष्णु का भक्त) और ग्राह में भयंकर युद्ध हुआ था. ऐसी मान्यता है कि गज को बचाने के लिए विष्णु स्वयं यहां आए थे, इसलिए ये हरिहर क्षेत्र है। मेले का एक बड़ा आकर्षण मीना बाजार भी होता है। यहां मुंबई से लेकर दिल्ली और लखनऊ तक का मीना बाजार लगता है।

मेले के बारे में बात करने पर लोग बताते हैं कि किसी दौर में मेले में सब कुछ बिकता था। यहां तक की गुलाम के तौर पर महिला और पुरुष भी बिकते थे। बदलते वक्त के साथ काफी कुछ बदला है लेकिन सोनपुर मेले अभी भी बरकरार है।

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