हम बिहारी हैं बाबू,
टुट कर बिखरना,
बिखर कर समेटना,
समेट कर.. दुबारा बनना..
हमें बख़ूबी आता है ।1।

हमें तोड़ लो- मरोड़ लो,
चाहे जिस भट्टी में झोंक दो,
हम दुबारा आएँगे,
और फिर से फ़ौलाद बन दिखाएंगे ।2।”

मेरी उपयुक्त पंक्तियां शायद बिल्कुल सही साबित होती रहीं हैं, बिहारियों ने बिहार को सम्मान बनाये रखने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी है।
शायद इसी वजह से बिहार के पश्चिमी चंपारण से ताल्लुक रखने वाले रवि प्रकाश ने ब्राज़ील में झंडे गाड़े हैं।

छोटे एवं सीमांत ग्रामीण डेरी किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिये
कच्चा दूध को अत्यधिक ठंडा करने वाली वहनीय स्वदेशी इकाई का आविष्कार करने
को लेकर भारतीय पीएचडी छात्र रवि प्रकास ने। ब्रिक्स-युवा नवोन्मेषक पुरस्कार’ जीता है।
आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) के पीएचडी छात्र प्रकाशप
चौथे ब्रिक्स- युवा वैज्ञानिक मंच,2019 के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा
ब्राजील भेजे गये 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
विभाग ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि मंच में भारत ने 25,000 डॉलर का प्रथम पुरस्कार जीता।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘भारत ने ब्राजील में छह से आठ नवंबर,2019 के दौरान ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच के
सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार जीता
इस प्रौद्योगिक के जरिये कच्चे दूध का तापमान आधे घंटे में 37 डिग्री सेल्सियस से सात डिग्री सेल्सियस किया जा सकता है।

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