बदलते समय के साथ इंधन और ऊर्जा के माध्यमों में भी बदलाव आते रहे हैं। पहले कोयला , फिर पेट्रोलियम , फिर टाइडल और विंड पावर और अब सौर ऊर्जा का प्रयोग बढ़ रहा है । ये क्लीन एनर्जी यानि कि स्वच्छ उर्जा का एक श्रोत है और ये एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें निरंतर प्राप्त होते रहती है ।

सबसे पहले सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कुकर बनाने में हुआ था उसके बाद , छोटे बल्ब  , स्ट्रीट लाइट और धीरे धीरे सोलर पैनल से गाड़ियाँ भी चलने लगीं ।

रूस में लंबे समय से सोलर बैटरी से उड़ने वाले प्लेन लेतायुस्चाया लैबोरेटोरिया (फ्लाइंग लैब) पर काम चल रहा था । इस प्लेन ने हाल में ही अपनी पहली लंबी उड़ान भरी , इसे 1700 किलोमीटर की दूरी तय तक मास्को से क्रीमिया लाया गया।

इस प्लेन के पायलट फ्योडोर कोनियुकोव 2021 में इससे पूरी दुनिया का चक्कर लगाने की योजना बना रहे हैं। सफलता मिलने के बाद इसके प्रोडक्शन मॉडल पर काम शुरू होगा।

इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली टीम का दावा है कि जल्द ही यह प्लेन बिना स्टॉप के पूरी धरती का चक्कर लगाने में सक्षम होगा।सात दिनों में सौर ऊर्जा से अपने आप चार्ज हो जाएगा।

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