सचमुच जमाना बदल रहा है, परंपराएं और रूढिय़ां टूट रही हैं। इसकी बानगी गुरुवार को आरा में देखने को मिली। भोजपुर जिले के सुप्रसिद्ध चर्म रोग विशेषज्ञ, पूर्व सिविल सर्जन एवं समाजसेवी डॉ. केबी सहाय के निधन पर उनकी दोनों बेटियों कजरी वर्मा व कविता देवकुलियार ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और घाट पर मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। यह देखकर सभी की आंखों में आंसू आ गए।

गुरुवार को आरा शहर की मानसरोवर कॉलोनी में दोनों बेटियों ने सनातन धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार कार्य कर पुत्र का फर्ज निभाया। डॉक्टर केबी सहाय दो माह से काफी बीमार थे। उनका इलाज पटना में चल रहा था। पटना स्थित अपने आवास पर बुधवार की रात 8.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को देर रात आरा में आवास पर लाया गया।

सुबह से दोपहर तक लोगों का अंतिम दर्शन के लिए तांता लगा रहा। इसके बाद शवयात्रा निकाली गई। गांगी स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। बेटियों ने मुखाग्नि दी। पुत्र ना होने की स्थिति में बड़े-बुजुर्गों ने जब बेटियों से यह सवाल किया कि मुखाग्नि कौन देगा तो दोनों का कहना था कि हम क्या बेटे से कम हैं। पापा ने हमें बेटों की तरह पाला है।

Sources:-Dainik Jagran

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