स्मार्ट सिटी भागलपुरः कहीं भारी जलजमाव तो कहीं पानी की किल्लत; 13 सौ करोड़ की योजना के बावजूद गंदगी और जाम से जूझ रहे शहरवासी

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बिहार के भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए अरबों रुपये की योजना बनायी गई। कई योजनाओं पर काम भी शुरू हुआ, लेकिन 1309 करोड़ की इस योजना से भी शहर के लिए कोढ़ बनी समस्याओं का हल नहीं ढूंढा गया। जिन इलाकों में जलजमाव हो रहा था, आज भी वहां जलजमाव हो रहा है। इसके लिए स्मार्ट सिटी की कोई योजना नहीं है। पानी के लिए शहर में अलग हाहाकार है। इसके अलावा भी कई समस्याएं हैं, जिसके लिए न कोई काम किया गया और न योजना बनायी गई। कुल मिलाकर कहें तो शहर की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई योजना नहीं बनी।

जहां कच्चा नाला उसका निर्माण नहीं

शहर में खासकर दक्षिणी हिस्से में अब भी कई बड़े नाले कच्चे हैं। इस कारण गंदगी भी रहती है और पानी की निकासी में भी समस्या है। बारिश हो जाए तो यह इलाका नरक हो जाता है। शीतला स्थान रोड, सिकंदरपुर रोड, वारसलीगंज, उर्दू बाजार सहित कई जगहों पर ऐसे नाले हैं। स्मार्ट सिटी योजना से नाले कहां बनाए जा रहे हैं हवाई अड्डा रोड, मेडिकल कॉलेज रोड, बरारी रोड आदि जगहों पर। इन जगहों पर कभी जलजमाव नहीं दिखता। वहीं बाजार क्षेत्र में नाले ढंग से नहीं बनने के कारण लोहापट्टी, सूजागंज आदि जगहों पर जलजमाव होता है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा के लिए कुछ नहीं

स्मार्ट सिटी की योजना में सिटी ट्रांसपोर्टिंग सिस्टम के लिए कोई प्रावधान नहीं हुआ है। अगर शहर में मिनी बसों की सुविधा दे दी जाती तो ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुविधाजनक हो सकता है। हालांकि स्मार्ट सिटी कंपनी के सीजीएम संदीप कुमार की मानें तो ट्रांसपोर्ट फॉर ऑल चैलेंज में भागलपुर ने लेवल वन क्वइलीफाय किया है। संभावना है कि सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए बस सहित कुछ सुविधाएं बेहतर होगी।

स्मार्ट सड़कों की योजना वहीं जहां पहले से अच्छी सड़क

शहर में अधिकांश उन्हीं सड़कों पर काम कराने की योजना है जहां पहले से अच्छी सड़क है। इसमें पुलिस लाइन रोड, मेडिकल कॉलेज रोड, नयाबाजार रोड, हवाई अड्डा रोड आदि शामिल हैं।

बिजली के तार को अंडरग्राउंड करने की योजना 

शहर में बिजली के तार को अंडरग्राउंड करने की कोई योजना नहीं है। इंजीनियर पुष्पराज कहते हैं कि मुख्य बाजार क्षेत्र हो या घनी आबादी वाला हिस्सा हर जगह सिर के ऊपर से तार गुजरते हैं। अगर तार को अंडरग्राउंड किया जाता तो सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर होता।

शहर में कोई व्यवस्थित बस स्टैंड नहीं

एक साल की अवधि और बची है। इसके बाद भागलपुर पूरी तरह से स्मार्ट सिटी कहलाएगा, लेकिन किसी शहर में अच्छा और व्यवस्थित बस स्टैंड होना जरूरी है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत इसके लिए कोई योजना नहीं बनायी गई। पूर्व डिप्टी मेयर डॉ. प्रीति शेखर कहती हैं, शहर में एक अच्छा बस स्टैंड होना चाहिए।

भोलानाथ पुल शहर की सबसे बड़ी पीड़ा

भागलपुर शहर में भोलानाथ पुल सबसे बड़ी समस्या है। यहां होने वाले जलजमाव से शहर की एक बड़ी आबादी त्रस्त है। सालों की यह समस्या स्मार्ट सिटी में भी कायम रहेगी। स्मार्ट सिटी में इसके लिए कोई योजना ही नहीं बनी। यहां फ्लाईओवर प्रस्तावित है, लेकिन इससे जलजमाव से मुक्ति नहीं मिलेगी। पूर्व पार्षद सदानंद मोदी कहते हैं कि यहां जलजमाव न हो या जलनिकासी की कोई व्यवस्था हो, इसके लिए एक्सपर्ट से योजना बनायी जा सकती थी।

एसी कमरे में प्लानर ने बना दी स्मार्ट सिटी

स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शहर की स्थिति का आकलन कर बेहतर सुविधाएं विकसित करनी थीं। इसकी प्लानिंग पीडीएमसी एजेंसी को करना था। कांग्रेस नेता विनय शर्मा ने कहा कि अब तक रखे गए तीन पीडीएमसी एजेंसी को लगभग 15 करोड़ भुगतान कर दिया, लेकिन पीडीएमसी के प्लानर बिना शहर का जायजा लिए, बिना फीडबैक लिए एसी कमरे में बैठकर स्मार्ट सिटी की प्लानिंग बना दी। नतीजा यह है कि शहर की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।

शहर में कोई फ्लाईओवर की योजना नहीं

स्मार्ट सिटी योजना में भागलपुर का चयन हुआ तो लोगों को लगा कि जाम से निजात के लिए कुछ फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे। लगभग 200 करोड़ की स्मार्ट रोड की योजना बनने के बाद भी शहर में फ्लाईओवर का प्रावधान नहीं किया गया। पूर्व पार्षद संजय सिन्हा कहते हैं कि इन करोड़ों की योजना से शहर में बदलेगा क्या? अगर पेभर ब्लॉक ही लगाना था तो यह नगर निगम भी कर सकता था।

हर सुविधाओं पर काम होगा: सीजीएम

स्मार्ट सिटी कंपनी के सीजीएम संदीप कुमार कहते हैं कि कोई भी प्लान एक बार में पूरे शहर के लिए नहीं बन सकता। इसलिए पहले एरिया बेस्ड डेवलपमेंट क्षेत्र चुना गया। इसमें काम होने के बाद शेष बचे वार्डों को भी कवर किया जाएगा। जिस समय यह प्लान बना उस समय काम कराने के लिए पहले कुछ सुविधाओं का चयन किया गया। उसपर काम हो रहा है। शहर में काफी कुछ नया दिखेगा।

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