धीरे-धीरे खुद को ऐसे बदल रहे हैं नीतीश, विरोधियों से नहीं खुद से लड़ रहे लड़ाई!

राजनीति

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। नीतीश की हर कदम के पीछे एक सोच होती है, इनकी लड़ाई विरोधियों से ज्यादा खुद से होती है।

अब नीतीश आहिस्ता-आहिस्ता खुद के अंदर एक और बदलाव ला रहे हैं, जिसकी भनक सियासी गलियारों में तो सबको है लेकिन किसी के पास काट नजर नहीं आ रहा है। जी हां, पिछले एक साल के नीतीश की गतिविधियों पर नजर रखिएगा तो उनके अंदर हो रहे बदलाव के बारे में पता चल जाएगा। दरअसल, नीतीश कुमार को बीजेपी के साथ रहते हुए अपनी सेक्यूलर छवि को बनाए रखने की चुनौती है।

क्योंकि विपक्ष उनके ऊपर लगातार आरोप लगा रही है कि वे संघ व बीजेपी के गोद में बैठ उनके एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन नीतीश कुमार अपनी छवि को बचाए रखने के लिए न तो हिंदू वोटरों को नाराज करना चाहते हैं और न ही मुस्लिम वोटरों को। इसके लिए नीतीश कुमार अब सॉफ्ट हिंदूत्व के राह पर चलना शुरू कर दिया है।

नीतीश कुमार जब से बिहार सीएम की कुर्सी पर बैठे हैं, तब से वे इक्के-दुक्के धार्मिक आयोजन में जाया करते थे। हां, पर्व त्यौहार के मौकों पर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना जरूर करते थे। लेकिन पिछले एक सालों में आप देखेंगे कि नीतीश कुमार लगातार हिंदू धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों में भी जाने लगे हैं। जहां साधू-संतों का जमावड़ा लगता है।

सबसे पहले बात करते हैं आरा के चंदवा में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन की करते हैं। उस इलाके के प्रसिद्ध संत जीयर स्वामी ने अक्टूबर 2017 में इसका आयोजन किया था। इस सम्मेलन में पूरे देश से लाखों की संख्या में साधू-संत व आमलोग आए थे। इसके साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत भी इस कार्यक्रम में आए थे। वहीं, बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी यहां पहुंचे थे। हालांकि दोनों के बीच मुलाकात नहीं हुई थी।

वहीं, बेगूसराय के सिमरिया में भी महाकूंभ का आयोजन किया गया था। नीतीश कुमार ने ही अक्टूबर 2017 इस का उद्घाटन किया था। साधू-संतों का जमावड़ा लगा था। वहां उन्होंने ने संतों से आशीर्वाद भी लिया था।

उसके बाद रामनवमी जुलूस के दौरान पूरे राज्य में भड़की हिंसा को लेकर भी नीतीश कुमार ने खुलकर किसी संगठन पर वार नहीं किया। इशारों-इशारों में लोगों को चेतावनी देते हुए कार्रवाई की बात करते रहे। मुसलमानों को खुश करने के लिए इस हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए उनके धार्मिक स्थलों के मरम्मत के लिए फंड जारी कर दिया। इसके जरिए नीतीश ने मुसलमानों की सहानुभूति बटोरने की कोशिश की।

इसी दौरान वे पटना के एक मजार पर चादरपोशी के लिए भी गए थे। वहां बैठकर नीतीश कुमार ने सूफी संगीत का आनंद भी लिया था।

यहीं नहीं पटना में मुस्लिम संगठनों के द्वारा दीन बचाओ, देश बचाओ रैली का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बीजेपी व मोदी सरकार को जमकर कोसा गया। नीतीश सरकार ने इसके आयोजन पर 40 रुपये खर्च किए। वहीं, कार्यक्रम के संयोजक खालिद अनवर को एमएलसी का टिकट दे दिया।

वहीं, फिर लौटते हैं नीतीश के सॉफ्ट हिंदूत्व के मुद्दे पर बीजेपी राम मंदिर के लिए लड़ाई लड़ रही है। हर चुनाव में राम मंदिर मुद्दा होता है। लेकिन नीतीश ने बिहार के सीतामढ़ी में भव्य जानकी मंदिर बनाने की घोषणा की है। साथ इस स्थल के विकास के लिए करोड़ों रुपये का फंड देने का भी वादा किया है। नीतीश कुमार ने जानकी जन्मोत्सव पर वहां जाकर पूजा अर्चना भी की। वहीं, रामभद्राचार्य के साथ मंच भी साझा किया।

ऐसे में बिहार की राजनीति में यह चर्चा है कि 2019 से पहले नीतीश कुमार सॉफ्ट हिंदूत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे हैं। जानकी मंदिर को रामायण सर्किट से जोड़ नरम हिंदूत्व वाली छवि को वे आगे बढ़ना चाहते हैं। गौरतलब है कि गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी सॉफ्ट हिंदूत्व का रास्ता अपनाया था, पार्टी को ठीक-ठाक कामयाबी मिली थी।

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