लंदन में सेल्स गर्ल की नौकरी करने से भारत की सबसे ताकतवर महिला मंत्री बनने का सफर

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भारत की पहली महिला रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण अपना मंत्रालय संभाल चुकी है। लेकिन अभी भी देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जिन्हें इनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है। तो चलिए सीतारमण के जीवन और राजनितिक करियर के बारे में कुछ अनोखी बातें जानते हैं। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ी सीतारमण लंदन में सेल्स गर्ल का काम कर चूकी है।

मोदी कैबिनेट में डिफेंस मिनिस्टर बनाई गईं निर्मला सीतारमण जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं। उन्होंने कभी लंदन में सेल्स गर्ल का काम भी किया था। उनके पति आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्र बाबू नायडू के कम्युनिकेशन एडवाइजर हैं। उनका प्रमोशन बीजेपी की तमिलनाडु में सीधे एंट्री की कोशिश और पार्टी में उनके बढ़ते कद का संकेत भी है। अब वे पार्टी की फायरब्रांड सुषमा स्वराज, उमा भारती और बहू की छवि वाली स्मृति ईरानी को पीछे छोड़ सबसे ताकतवर महिला मंत्री भी बन गई हैं।

निर्मला के पिता रेलवे में थे। जल्दी-जल्दी ट्रांसफर होता रहा। इस वजह से निर्मला ने स्कूली जीवन में ही तमिलनाडु का बड़ा हिस्सा देख लिया। वे बाद में कॉलेज की पढ़ाई करने दिल्ली आ गईं। मास्टर्स के लिए जेएनयू में दाखिला लिया। यहां टेक्सटाइल ट्रेड में एमफिल किया। इसी दौरान स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के लिए फ्री थिंकर्स के साथ जुड़ गईं।

दिल्ली में ही सीतारमण की मुलाकात आंध्र प्रदेश के परकल प्रभाकर से हुई। दोनों ने 1986 में शादी कर ली। इसके बाद दोनों ब्रिटेन चले गए। प्रभाकर जब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी कर रहे थे तब निर्मला हैबिटेट कंपनी में सेल्स गर्ल की थीं, लेकिन जल्दी ही वे नौकरी छोड़कर प्राइस वाटरहाउस कूपर्स के साथ सीनियर मैनेजर के तौर पर जुड़ गईं। 1991 में सीतारमण पति के साथ भारत लौट आईं। निर्मला ने 1991 में ही बेटी को जन्म दिया।

उन्हीं दिनों पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के कारण चेन्नई में तनाव था। इस वजह से निर्मला को तीन दिन तक अस्पताल में ही रहना पड़ा। इसके बाद डॉक्टर ने अपनी गाड़ी में सफेद झंडा लगाकर उन्हें रेस्क्यू किया। भारत लौटने के बाद निर्मला और प्रभाकर हैदराबाद में बस गए। निर्मला शिक्षा के क्षेत्र में काम करने लगीं। 2003 से 2005 के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। 2006 में राजनीति में आ गईं।

राजनीति के लिए चुना कठिन रास्ता :-

राजनीति में उन्होंने आसान की बजाय कठिन रास्ता चुना। उनकी सास और ससुर दोनों कांग्रेस विधायक रह चुके थे। ससुर तो मंत्री रहे थे, लेकिन निर्मला ने 2006 में बीजेपी ज्वाइन की। अगले साल उनके पति ने चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी ज्वाइन की। पर जल्दी ही वे पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। फिलहाल वे आंध्र प्रदेश में सीएम चंद्रबाबू नायडू के कम्युनिकेशन एडवाइजर हैं। बतौर रक्षा मंत्री निर्मला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी की सदस्य होंगी। पीएम और गृह मंत्री की गैरमौजूदगी में रक्षा मंत्री कैबिनेट की बैठक लेता है। ऐसे में निर्मला का कद जेटली और सुषमा से ऊंचा होगा।

भारत की पहली महिला रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण अपना मंत्रालय संभाल चुकी है। लेकिन अभी भी देश में लाखों लोग ऐसे हैं, जिन्हें इनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता है। तो चलिए सीतारमण के जीवन और राजनितिक करियर के बारे में कुछ अनोखी बातें जानते हैं। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ी सीतारमण लंदन में सेल्स गर्ल का काम कर चूकी है।

मोदी कैबिनेट में डिफेंस मिनिस्टर बनाई गईं निर्मला सीतारमण जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं। उन्होंने कभी लंदन में सेल्स गर्ल का काम भी किया था। उनके पति आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्र बाबू नायडू के कम्युनिकेशन एडवाइजर हैं। उनका प्रमोशन बीजेपी की तमिलनाडु में सीधे एंट्री की कोशिश और पार्टी में उनके बढ़ते कद का संकेत भी है।

अब वे पार्टी की फायरब्रांड सुषमा स्वराज, उमा भारती और बहू की छवि वाली स्मृति ईरानी को पीछे छोड़ सबसे ताकतवर महिला मंत्री भी बन गई हैं। निर्मला के पिता रेलवे में थे। जल्दी-जल्दी ट्रांसफर होता रहा। इस वजह से निर्मला ने स्कूली जीवन में ही तमिलनाडु का बड़ा हिस्सा देख लिया। वे बाद में कॉलेज की पढ़ाई करने दिल्ली आ गईं। मास्टर्स के लिए जेएनयू में दाखिला लिया।

यहां टेक्सटाइल ट्रेड में एमफिल किया। इसी दौरान स्टूडेंट यूनियन के चुनाव के लिए फ्री थिंकर्स के साथ जुड़ गईं।
दिल्ली में ही सीतारमण की मुलाकात आंध्र प्रदेश के परकल प्रभाकर से हुई। दोनों ने 1986 में शादी कर ली। इसके बाद दोनों ब्रिटेन चले गए। प्रभाकर जब लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पीएचडी कर रहे थे तब निर्मला हैबिटेट कंपनी में सेल्स गर्ल की थीं, लेकिन जल्दी ही वे नौकरी छोड़कर प्राइस वाटरहाउस कूपर्स के साथ सीनियर मैनेजर के तौर पर जुड़ गईं। 1991 में सीतारमण पति के साथ भारत लौट आईं।

निर्मला ने 1991 में ही बेटी को जन्म दिया। उन्हीं दिनों पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के कारण चेन्नई में तनाव था। इस वजह से निर्मला को तीन दिन तक अस्पताल में ही रहना पड़ा। इसके बाद डॉक्टर ने अपनी गाड़ी में सफेद झंडा लगाकर उन्हें रेस्क्यू किया। भारत लौटने के बाद निर्मला और प्रभाकर हैदराबाद में बस गए। निर्मला शिक्षा के क्षेत्र में काम करने लगीं। 2003 से 2005 के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रहीं। 2006 में राजनीति में आ गईं। राजनीति में उन्होंने आसान की बजाय कठिन रास्ता चुना।

उनकी सास और ससुर दोनों कांग्रेस विधायक रह चुके थे। ससुर तो मंत्री रहे थे, लेकिन निर्मला ने 2006 में बीजेपी ज्वाइन की। अगले साल उनके पति ने चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी ज्वाइन की। पर जल्दी ही वे पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। फिलहाल वे आंध्र प्रदेश में सीएम चंद्रबाबू नायडू के कम्युनिकेशन एडवाइजर हैं। बतौर रक्षा मंत्री निर्मला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी की सदस्य होंगी। पीएम और गृह मंत्री की गैरमौजूदगी में रक्षा मंत्री कैबिनेट की बैठक लेता है। ऐसे में निर्मला का कद जेटली और सुषमा से ऊंचा होगा।

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