बिहार की महान विभूतियों में से एक महान गणितज्ञ पदमश्री डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आनेवाले दिनो में बिहार में  कई वशिष्ठ पैदा होने की उम्मीद है. दरअसल यह संभव हो पाया है ‘शुक्रिया वशिष्ठ’ नामक संस्थान की वजह से.

मुफ्त में पढ़ाई की सुविधा
वशिष्ठ नारायण सिंह ट्रस्ट के माध्यम से पटना में शुरू हुए इस संस्थान के माध्यम से बिहार के आर्थिक रुप से कमजोर बच्चों को डॉक्टर औऱ इंजीनियर बनने का मौका मिल सकेगा वह भी नि:शुल्क. बिहार में आईएएस, आईपीएस दो साल तक संस्थान इन बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा औऱ आवास की सुविधा प्रदान कर उन्हें योग्य बनाएंगे.


आर्थिक रूप से कमजोर को मदद

डॉ वशि्ष्ठ नारायण जैसी शख्सियतें कभी नहीं मरती. उनके ज्ञान-विज्ञान सदैव अमर रहते हैं. इसी अवधारणा के साथ पटना में शुक्रिया वशिष्ट नामक संस्थान की शुरुआत की गई है. इस संस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर 40 बच्चों को दो सालों तक बेहतर पठन-पाठन के साथ ही आवासीय सुविधा के साथ बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की कोशिश की जायेगी.

क्लासरूम के साथ लाइब्रेरी भी
संस्थान में क्लासरूम के साथ ही लाइब्रेरी की भी सुविधा दी जायेगी. बच्चो का नामांकन टेस्ट के आधार पर होगा और इसके लिये राज्य स्तरीय परीक्षा का आयोजन किया जायेगा.

परिजनों की सराहनीय पहल
दरअसल यह सब वशिष्ठ  नारायण सिंह  के परिवारवालों की उस पहल का परिणाम है जिसकी परिकल्पना उनके जीते जी की गई थी. संस्थान की लाइब्रेरी में वशिष्ठ नारायण सिंह की लिखित किताबें, चि्ट्ठी, उनके संस्मरण और दुर्लभ एवं उपयोगी किताबें रखी गयी हैं.



लोगों से मदद की अपील
सबसे बड़ी बात है कि  2 सालों में आनेवाले 60 लाख खर्च के लिये किसी संस्था ने  आर्थिक मदद नही की है. वैसे वशिष्ठ बाबू के परिवारवाले इस बड़े सपने को पूरा करने के लिये लोगों से मदद की अपील भी कर रहे हैं.

भीतेज ने किया सहयोग
वशिष्ठ नारायण सिंह के भतीजे मुकेश सिंह की मानें तो संस्थान का सपना वशिष्ठ नारायण सिंह ने जीवित रहते हुए ही देखा गया था जो अब जाकर पूरा हो रहा है. संस्थान के लिए आर्थिक मदद करनेवाले भूषण कुमार इसे अपना सौभाग्य मानते हैं   कि मदद का मौका उन्हें मिला.

NOBA के सदस्य भी पढ़ाएंगे
संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नोबा यानी नेतरहाट ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के भी लोग जुड़े हैं. इन लोगों ने हर तरह का योगदान करने का भोरसा दिलाया है. इसके साथ ही मौजूदा आईएएस औऱ आईपीएस अधिकारी भी इसमें बच्चो को पढांयेंगे. एक डीआईजी ने तो इसके लिये सहमति भी जतायी है.



डीएम ने मदद का दिया भरोसा
पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने भी पहल की सराहना करते हुए मदद का भरोसा जताया  है.  बहरहाल, वशिष्ठ बाबू के परिजनों ने तो अपनी जिममेवारी पूरी कर दी है लेकिन अब बारी हमारी, आपकी औऱ सरकार की है ताकि यह संस्थान अपने मकसद में दीर्घकाल तक  कामयाब  रह  सके.

Sources:-News18

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