माना जाता है कि प्राचीन काल में भारतीय महिलाओं की स्थिति आधुनिक काल से अच्छी थी। प्राचीन काल में महिलायें पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर समाज में काम करती थीं। ‘महिला सशक्तिकरण’ के बारे में जानने से पहले हमें ये समझ लेना चाहिये कि हम ‘सशक्तिकरण’ से क्या समझते है। चीन काल में तो यहाँ तक कहा जाता था कि जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवताओं का वास होता है।

परिवार और समाज की हदों को पीछे छोड़ने के द्वारा फैसले, अधिकार, विचार, दिमाग आदि सभी पहलुओं से महिलाओं को अधिकार देना उन्हें स्वतंत्र बनाने के लिये है। आज जो हम बात करने जा रहे है , वो है शोभा की। शादियों में टेंट करने काम तो आप जानते ही है। लेकिन किसी लड़की को काम करते देखा है आपने , नहीं न और शायद हैरानी भी हुए होगी। लेकिन ये बात बिलकुल सही है।

लेकिन आधुनिक काल में महिलाओं की स्थिति प्राचीन काल से बहुत ख़राब है, और इसलिए आज का समाज महिला सशक्तिकरण पर विचार कर रहा है और कोशिश की जा रही है कि महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाया जा सके। अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिये महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है।

बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली है शोभा कुमारी। साथ ही बिहार की पहली टेंट संचालिका के लिए सम्मानित भी किया गया है। इतना ही नहीं शोभा जनरेटर तक फटाफट चालू कर देती है। शोभा के पिता यह का करते थे , सारा खर्च इससे ही ठीक होता था , फिर घर की परेशानी को देखते हुए शोभा ने यह काम शुरू कर दिया , पिता का हाथ बटाना शुरू कर दिया। घर का पूरा सहारा बन गयी , आज शोभा के पिता आराम से घर से काम करते हैं। भाई इंजीनियरिंग की पढाई कर रहा , बहने कॉलेज जाती है। शोभा एक मिशाल बन चुकी है।

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