यहां जिसको शिव मानकर कर रहे थे लोग पूजा, पुरातत्व विभाग ने खोज बताया उसे सूर्यदेव की चारमुखी मूर्ति

आस्था

भागलपुर के नाथनगर प्रखंड का मनसर मंदिर। सदियों से इस मंदिर के अंदर जिस बड़े शिवलिंग की पूजा की जा रही है, वे शिव नहीं, सूर्य हैं। यह मूर्ति शिवलिंग की शक्ल में चार चेहरों वाले सूर्यदेव की है।

यह खुलासा निदेशक, बिहार सरकार की खोज टीम की अगुआई कर रहे पुराविद अरविंद सिन्हा रॉय ने किया है। करीब चार महीने से अंग क्षेत्र की बिखरी धरोहरों का अध्ययन कर रहे अरविंद यक्ष-यक्षिणी की मूर्ति की तलाश में मनसर गए थे।

अरविंद के अनुसार मंदिर की शैली पर मुगलकालीन प्रभाव है, पर सूर्यदेव की प्रतिमा पाल काल की है। उसी काल में गोल पीलर पर चारों ओर सूर्य का चेहरा गढ़ा जाता था। यह प्रतिमा अरघा से करीब तीन फीट ऊंची है और इतिहासकार मान रहे हैं कि यह छह फीट से अधिक जमीन के अंदर भी होगी।

पुरातत्व विभाग की टीम ने किया खुलासा, मंदिर की शैली पर मुगलकालीन प्रभाव दिख रहा है। ग्रामीणों को खोज टीम के किसी तर्क से कोई फर्क नहीं पड़ता।

वो शिव और सूर्य के विभेद पर ऋगवेद की उक्ति ‘एकम् सत् विप्रा बहुधा वदंति’ अंगीकार किए हुए हैं। स्थानीय सुरेश गोस्वामी कहते हैं कि नाम में क्या रखा है, सभी शिव में ही तो समाहित हैं।
हमारे पूर्वज और हमलोग ‘इन्हें’ चेहरे वाला शिव मानते रहे हैं और आगे भी उसी भाव से इनकी पूजा होती रहेगी। पहले भी किसी जानकार ने इस शिवलिंग की पहचान बताई होगी। इसी कारण इस सूर्य प्रतिमा के ठीक बगल में एक शिवलिंग भी स्थापित है।

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