शिव और सिद्ध योग में आज होगी नागदेवता की पूजा, शुक्रवार होने से बढ़ा महत्व

आस्था

सावन मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बार नागपंचमी का व्रत कई वर्षों बाद शुभ संयोग को लेकर आ रहा है।सावन माह की नागपंचमी 28 जुलाई यानि आज है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती के साथ नाग देवता की भी पूजा धूमधाम से होगी। आचार्य विनोद झा ने कहा कि ज्योतिष के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं।ऐसे में नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने का विशेष महत्व है। पंडित बुद्धन ओझा ने कहा कि काफी वर्ष बाद सावन माह के नागपंचमी के दिन सुंदर योग बना है। नागपंचमी के दिन हस्ता नक्षत्र में शिव व सिद्ध योग में भगवान नाग देवता की पूजा -अर्चना होगी।

दिन शुक्रवार होने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है यह दिन आदि शक्ति का दिन होता है। वैसे तो पंचमी तिथि 27 जुलाई दिन गुरुवार को दिन 9 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होकर 28 जुलाई 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। शुक्रवार के दिन 9.15 मिनट तक पंचमी है इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ हो जाएगी।
पंचमी और षष्ठी तिथि का मिश्रण होने से इस दिन का खास महत्व है। उतर फाल्गुनी नक्षत्र 8.11 मिनट तक रहेगा। पंडित बुद्धन ओझा ने कहा कि भगवान शंकर का आभूषण होने के साथ भगवान विष्णु के शय्या के रूप में नागदेवता की पूजा होती है।
वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना गया है। आचार्य विनोद झा वैदिक ने कहा कि नागों को धारण करने वाले भगवान शिव की पूजा करने के साथ नाग की पूजा होती है। नाग पंचमी के दिन व्रत रखकर नाग देवता की पूजा के लिए प्रसाद खीर बनाई जाती है।
खीर का भोग सबसे पहले नाग देवता को लगाया जाता है। कुंडली में अगर किसी व्यक्ति को कालसर्प दोष है तो इस दिन पूजा करने से काल सर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है।

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