सड़क से 5km दूर आधा km नीचे पहाड़ों में छिपे हैं Shiv , दर्शन के लिए झरनों से होकर गुजरते हैं भक्त

आस्था

आजकल मानसून का समय चल रहा है और साथ ही सावन भी। ऐसे में भगवान Shiv के भक्तों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं भोले के मंदिरों में।

ऐसे में मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में ऐसे कई मंदिर है जो फेमस तो नहीं है लेकिन यहां का वातावरण इतना मनमोहक है कि लोग दूर-दूर से यहां आते है। एमपी के पर्यटन और धार्मिक स्थलों के नजारे लोगों को खूब लुभा रहें हैं।

नीमच और रतलाम में कुछ जगह मंदिर जाने के लिए झरने के नीचे से होकर गुजरना होता है। बारिश के बाद यहां लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है। खूबसूरत वादियों से होते हुए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं केदारेश्वर मंदिर।




1. बड़ा व छोटा केदारेश्वर : सैलाना-शिवगढ़ रोड पर सैलाना से 5 किमी बड़ा केदारेश्वर है। महादेव मंदिर लगभग 600 मीटर गहराई में पहाड़ों के बीच है। यहां तीन मनमोहक झरने हैं।

मंदिर का रास्ता इन झरनों के बीच से होकर गुजरत़ा है। बारिश के बाद ये झरने पूरी बहार पर हैं। झरनों का पानी मंदिर के सामने बने कुंड में गिर रहा है। कहते है मंदिर करीब तीन सौ साल पुराना है।




यहां की एक रियासत के राजा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। सावन महीना होने से कल्याण केदारेश्वर मंदिर पर Shiv भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है।

सैलाना से महज 5 किमी दूर सड़क से करीब आधा किमी नीचे पहाड़ों के बीच स्थित है प्राकृतिक गुफा में स्थापित केदारेश्वर महादेव। ठीक ऊपर से झरना बहता है, जो Shiv लिंग के सामने बने कुंड में गिरता है।




थोड़ी ही दूरी पर दो और छोटे-छोटे झरने हैं, जो बारिश में मंदिर परिसर की खूबसूरती बढ़ा रहे हैं।

2. ईशरथुनी : रतलाम से लगभग 8 किमी दूर स्थित यह पूरी तरह प्राकृतिक स्थान। छोटी नदी का पानी लगभग 10 मीटर ऊंचाई से गिरता है। 15 मीटर चौड़ाई में गिरते झरने को देखने का अपना ही आनंद है। इसी तरह शहर से करीब 8 किमी दूर जामण पाटली में हाल ही में हुई बारिश के बाद खूबसूरत नजारा दिख रहा है।

3. भर्डादोह झरना : जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर मनासा तहसील के कंजार्डा से 3 किमी दूर भर्डादोह का झरना भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां तीन नदियों का संगम होता है। नदी के आसपास शेर की गुफाएं है।




3. जाजू सागर डेम : जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर, हर्कियाखाल के समीप जाजू सागर डेम प्राकृतिक नजारों एवं हरियाली से आच्छादित हो गया है। यहां तक पहुंचने के लिए रोडवेज, प्राइवेट बस एवं टैंपो की सुविधाएं उपलब्ध है।

4. भंवरमाता का झरना : जिला मुख्यालय से करीब 26 किमी दूर 60 फीट ऊंचा प्राकृतिक झरना एवं स्टापडेम पर बहने वाली चादर पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र है। यहां मां भंवरमाता विराजित है। जिनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

Shiv




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