इस मंदिर में झूक जाता है सभी का सिर, मंदोदरी ने यहीं की थी शिव की पूजा

आस्था

मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें इस मंदिर में दर्शन दिए और वरदान मांगने के लिए कहा था। मेरठ में सदर स्थित श्री बिल्वेश्वर नाथ शिव मंदिर में त्रेता युग में रावण की पत्नी मंदोदरी भगवान शिव की पूजा करने के लिए अपनी सखियों के साथ प्रतिदिन यहां आती थी।

मंदोदरी ने भगवान भोलेनाथ से इच्छा जताई कि उसका पति धरती पर सबसे बड़ा विद्वान और शक्तिशाली हो। भोलेनाथ की कृपा से यहीं पर रावण और मंदोदरी का मिलन हुआ तथा मंदोदरी को पति के रूप में रावण की प्राप्ति हुई। तभी से इस मंदिर को भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त है।

मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से इस मंदिर में भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। पिछले तीस सालों से मंदिर में पूजा कर रहे पुजारी आचार्य पं. हरीशचंद जोशी बताते हैं कि मंदिर की विशेषता यह है कि यहां बिना शीश झुकाये आप अंदर प्रवेश नहीं कर सकते।

शिवलिंग में जल चढ़ाने के लिए शीश झुकाकर ही अंदर प्रवेश होता है। इस समय सुधा स्वामी मंदिर की संरक्षक हैं। हर शिवरात्रि पर लाखों कांवड़ियें यहां पर मंदिर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं। हर सोमवार को काफी भीड़ लगती है। जब भक्तों की मनोकामना पूरी हो जाती है तो वो -शिव पार्वती की पोशाक चढ़ाने के बाद भंडारे का आयोजन करते हैं।

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