शिव भक्ति का ऐसा अनूठा नजारा, बाबा बैद्यनाथ के दर पर बिच्छू बनकर जा रहे अशोक गिरी

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सुलतानगंज से बाबा नगरी देवघर तक की पैदल यात्रा 105  किलोमीटर की है. इस मार्ग से गांगाजल लेकर कांवड़िये बाबा बैद्यनाथ को जलाभिषेक करने जाते हैं. इस 105 किलोमीटर के मार्ग मैं लगभग 55 किलोमीटर बांका जिले में पड़ता है. सावन के अलावा सालोंभर शिवभक्त इन कांवड़िया मार्ग से होकर गुजरते हैं. शिवभक्त भक्ति में लीन होकर बाबा को पैदल जाकर जलाभिषेक करते हैं.

श्रावण से शुरू हुआ कांवड़ियों के चलने का सिलसिला अभी भी जारी है


बांका कटोरिया कांवरिया पथ पर अपने हाथों के बल पर बाबा धाम की 105 किलो यात्रा कर रहे बिच्छू बम चल रहे हैं. सुलतानगंज से बाबा धाम की डगर पर भोलेनाथ के भक्तों का एक से बढ़कर एक अनूठा रंग देखने को मिलता है. विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में पूरे महीने गेरुआ वस्त्र में रंगे कांवड़ियों से पथ पटा रहता है. वहीं डाक बम और दंडी बम फिर अपने माता-पिता को कांवर पर बिठाकर श्रवण कुमार, डमरु बम जो पूरे शरीर के बल पर लेटते हुए दंड देते हुए बाबा धाम जाते हैं को देखा जा सकता है.

बिच्छू बम एक दिन में डेढ़ से 2 किलोमीटर अपने हाथों के बल चल बढ़ रहे हैं बाबा के धाम की ओर 
इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के एक शिव भक्त कठिन दुर्गम यात्रा करते हुआ बाबा धाम जा रहे हैं जो इस क्षेत्र में चर्चा का विषय है. वह अपने दोनों हाथों के बल पर ही आगे बढ़ते हुए सुलतानगंज से बाबा धाम की संकल्प यात्रा पूरी कर रहे हैं. सावन मास की पूर्णिमा तिथि यानी रक्षाबंधन के दिन से ही बिच्छू बम ने अपनी संकल्प यात्रा शुरू की थी.

कामरिया पथ के तरपतिया गांव तक पहुंचने में उन्हें 97 दिनों का वक्त लगा है. एक दिन में वह डेढ़ से 2 किलोमीटर अपने हाथों के बल चल पाते हैं. उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा नाथनगर निवासी अशोक गिरी उर्फ मनू सोनी उर्फ बिच्छू बम का संकल्प बाबा धाम में जल अर्पण के बाद हाथों के बल ही बासुकीनाथ धाम जाने का भी है. उनके साथ गांव के ही भक्त बद्रीनाथ एवं जूना अखाड़ा के रमन भारतीय उर्फ नागा बाबा भी पैदल चल रहे हैं. बाबा धाम की डगर पर बिच्छू बम को देखने वालों का तांता लगा रहता है.

 

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