महाराष्ट्र के शिरडी में स्थानीय लोगों ने साईं बाबा की जन्मस्थली को लेकर उपजे विवाद के बाद रविवार को बंद का आह्वान किया है. हालांकि, साईं बाबा मंदिर के ट्रस्टियों ने शनिवार को कहा कि बंदी के बावजूद मंदिर खुला रहेगा. शिरडी स्थित साईं मंदिर में देशभर के लाखों श्रद्धालु आते हैं.

गौरतलब है कि यह विवाद उस समय पैदा हुआ, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परभणी जिले के पाथरी में साईं बाबा जन्मस्थान पर सुविधाओं का विकास करने के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने की घोषणा की थी. कुछ श्रद्धालु पाथरी को साईं बाबा की जन्मस्थली मानते हैं, जबकि शिरडी के लोगों का दावा है कि उनका जन्मस्थान अज्ञात है.

शिरडी स्थित श्री साईंबाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक मुगलीकर ने बताया कि बंद के बावजूद मंदिर खुला रहेगा. स्थानीय भाजपा विधायक राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि उन्होंने स्थानीय लोगों द्वारा बुलाये गये बंद का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को साईं बाबा की जन्मस्थली पाथरी होने संबंधी बयान को वापस लेना चाहिए.

पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि देश के कई साईं मंदिरों में एक पाथरी में भी है. सभी साईं भक्त इससे आहत हुए हैं. इसलिए इस विवाद को खत्म होना चाहिए. कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने शुक्रवार को कहा था कि श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का पाथरी में विकास का विरोध जन्मस्थली विवाद की वजह से नहीं किया जाना चाहिए.

इसके पहले मीडिया में खबर थी कि गंगा-जमुनी तहजीब का जीता-जागता प्रतीक शिरडी का साईं मंदिर जन्मस्थली विवाद के चलते रविवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद हो जायेगा. दरअसल, जन्मस्थली का विवाद तब पैदा हुआ, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अभी हाल ही में एक भाषण में साईं बाबा की जन्मस्थली शिरडी की बजाय यहां से करीब 275 किलोमीटर दूर पाथरी को मानकर बताया और उसके विकास के लिए 100 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया.

साईं बाबा के मानने वालों में ज्यादातर लोग शिरडी को उनकी जन्मस्थली मानते हैं. वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पाथरी को उनका जन्मस्थान बताते हैं. मुख्यमंत्री ठाकरे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के लोग पाथरी को जन्मस्थली मानते हैं. मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में पाथरी के विकास का ऐलान कर इस विवाद को जन्म दे दिया. हालांकि, शिरडी के साईं ट्रस्ट के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के इसी बयान का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने साईं मंदिर को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान किया है.

साईं मंदिर ट्रस्ट के कुछ लोगों ने मीडिया को जानकारी दी है कि साईं बाबा ने कभी अपनी जाति, जन्मस्थान और परिवार के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं दी. इसलिए पाथरी को जन्मभूमि बताकर उसका विकास कराना सही नहीं है. वहीं, पाथरी को जन्मस्थली मानने वाले लोगों का कहना है कि शिरडी का साईं मंदिर बाबा का समाधि स्थल है. उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण में यही पर समाधि ली थी. उनकी मृत्यु 15 अक्टूबर, 1918 को उसी जगह पर हुई थी, जहां आज शिरडी का साईं मंदिर खड़ा है.

वहीं, कुछ लोग साईं बाबा को हिंदू तो कुछ लोग मुसलमान मानते हैं. इसीलिए उन्हें गंगा-जमुनी तहजीब का जीता-जागता प्रतीक भी माना जाता है. साईं बाबा खुद ‘सबका मालिक एक है’ की बात कहा करते थे. ऐसा भी कहा जाता है कि साईं बाबा के भक्त उनकी ज्योत जलाए रखने के लिए वर्ष 1922 में इस मंदिर का निर्माण कराना शुरू कर दिया. उनके भक्तों का कहना है कि साईं बाबा 16 साल की उम्र में शिरडी आये थे और जनकल्याण के लिए यहीं आकर बस गये. सारा जीवन यहीं बिताया और अंत में यहीं समाधि ली.

वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक दुर्रानी अब्दुल्ला खान ने पाथरी को साईं बाबा की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि इस बात को साबित करने के पर्याप्त सबूत हैं कि साईबाबा का जन्म परभणी जिले के पाथरी में हुआ था. लोगों को डर है कि अगर महाराष्ट्र के इस शहर का विकास होता है, तो शिरडी का महत्व कम हो जायेगा, जहां साईं बाबा का विशाल मंदिर है. पाथरी के श्री साईं जन्मस्थली मंदिर में भी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

खान ने कहा कि अहमदनगर जिले के शिरडी में रहने वाले लोगों को डर है कि अगर पाथरी का विकास होगा, तो शिरडी का महत्व कम हो जायेगा. उन्होंने कहा कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि पाथरी ही साईं बाबा की जन्मस्थली है और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी पहले इस तथ्य का समर्थन कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि शिरडी साईं बाबा की कर्मभूमि है. वहीं, पाथरी उनकी जन्मभूमि है और दोनों ही स्थानों का अपना महत्व है.

खान ने कहा कि देश-दुनिया से बड़ी संख्या में लोग पाथरी आते हैं. इस कस्बे में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पाथरी को 100 करोड़ रुपये की सहायता की सहमति जता दी है. शिरडी के लोगों को इससे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वे नहीं चाहते कि पाथरी को साईं बाबा का जन्मस्थान कहा जाए. राकांपा विधायक ने कहा कि शिरडी के निवासियों को डर है कि अगर पाथरी सुर्खियों में आ जाता है, तो उनके यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आ जायेगी.

Prabhat Khabar

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