भगवान विष्णु को काले​ तिल से पूजा करने का व्रत षटतिला एकादशी 20 जनवरी दिन सोमवार को है। हिन्दू कैलेंडर के माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि षटतिला एकादशी के नाम से लोकप्रिय है। इस दिन भगवान ​विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना विधिपूर्वक की जाती है। पूजा के समय काले तिल के प्रयोग का विशेष महत्व होता है। षटतिला एकादशी के दिन काले तिल का प्रयोग करने से सभी पापों का नाश होता है। इस दिन पूजा में काली गाय का भी महत्व होता है।

षटतिला एकादशी व्रत मुहूर्त

षटतिला एकादशी तिथि का प्रारंभ: 20 जनवरी दिन सोमवार को तड़के 02:51 बजे।

षटतिला एकादशी तिथि का समापन: 21 जनवरी दिन मंगलवार को तड़के 02:05 बजे।

षटतिला एकादशी व्रत का पारण: 21 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 08:00 बजे से सुबह 09:21 बजे तक।

व्रत एवं पूजा विधि

षटतिला एकादशी के दिन तिल का उबटन, तिल वाले पानी से स्नान, तिल से हवन, भोजन में तिल का प्रयोग, तिल वाले जल का पान और तिल का दान करने का विधान है। एकादशी के दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का मन में स्मरण करने के बाद षटतिला एकादशी व्रत का संकल्प लें।

दशमी के दिन तिल मिश्रित गाय के गोबर से 108 उपले बनाएं। फिर एकादशी को व्रत संकल्प के साथ भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें। उन्हें चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेद्य आदि से पूजा करें। फिर श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़ा, नारियल अथवा बिजौर के फल से विधिपूर्वक पूजा कर अर्घ्य दें। उड़द और तिल मिश्रित खिचड़ी का भोग लगाएं और प्रसाद स्वरूप बाट दें।

एकादशी को रात में श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें। रात के समय तिल मिश्रित गाय के गोबर से बने 108 उपलों का उपयोग हवन में करें। हवन के समय 108 बार “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। अगले दिन सुबह पारण कर व्रत खोलें।

षटतिला एकादशी व्रत का दान

षटतिला एकादशी पूजा के बाद तिल से भरा बर्तन, छाता, घड़ा, जूता, वस्त्र आदि दान करें। संभव हो तो काली गाय का दान कर सकते हैं।

Sources:-Dainik Jagran

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