shashi kapoor bihar connection

शशि कपूर बिहार के इस टाकीज़ में करते थे नाटक, यहाँ से था ये ख़ास लगाव

कही-सुनी

shashi kapoor bihar connectionशशि कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर से महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शशि का गहरा नाता था। इसी आत्मीय संबंध के नाते उन्होंने एक पत्र दिया जो उनके बेटे शशि कपूर के नाम से था। यह बात 1970-71 की है। मुजफ्फरपुर के अभिनेता विजय खरे को आज तक याद है जब वह वह पत्र लेकर मुंबई गए थे तब शशि कपूर ने उनका कितना स्वागत किया था। उनके सहयोग की वजह से ही नामचीन गायक मुकेश उस समय मुजफ्फरपुर आकर कार्यक्रम के लिए राजी हुए और आए भी।

सोमवार की शाम जब अचानक शानदार और दिग्गज अभिनेता शशि कपूर के निधन की खबर मिली अभिनेता विजय खरे उनकी स्मृतियों को साझा करते हुए भावुक हो उठे। मुजफ्फरपुर से शशि कपूर का गहरा नाता बचपन से रहा। आचार्य जानकीवल्लभ शशि के साथ उनके पिता पृथ्वीराज कपूर के रिश्तों का बंधन ऐसा था कि मुंबई में उनके आवास पर अलग से जानकी कुटीर बनाया गया था।

 

शशि जी से जुड़े रहे डॉ. संजय पंकज बताते हैं कि कई बार आचार्य श्री यह किस्सा दुहराते थे कि कैसे 50 के दशक में पृथ्वी थिएटर के साथ सरैयागंज स्थित चित्र टॉकीज में नाटक खेलने के लिए शशिकपूर भी आए थे। तब वह इतने गोल-मटोल थे कि वह उन्हें छूते और कहते कि कहीं मक्खन का गोला तो नहीं! भावुकता और रिश्तों से गहरे तक जुड़े कपूर परिवार का एक और किस्सा भी आचार्य श्री अक्सर सुनाते थे कि किस तरह उनकी लिखी किताब ‘नाट्य सम्राट पृथ्वीराज कपूर’ को शशिकपूर ने प्रकाशक से पूरी की पूरी खरीद डाली थी और सबको गिफ्ट करते थे। विजय खरे कहते हैं कि यह किताब उनकी गाड़ी की भी पहचान थी।

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काफी समय से बीमार चल रहे बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता शशि कपूर ने सोमवार को 79 साल की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में आखिरी सांस ली।

अपने खास अंदाज से हिंदी सिने जगत पर चार दशकों तक राज करने वाले शशि कपूर को अभिनय विरासत में मिली थी।
हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने वाले पृथ्वीराज कपूर के घर 18 मार्च, 1938 को जन्मे शशि कपूर पृथ्वीराज की चार संतानों में सबसे छोटे थे। उनकी मां का नाम रामशरणी कपूर था। उन्हें वह सब कुछ मिला था, जो सफल होने के लिए सही अनुपात में चाहिए था। मोहक मुस्कान, आकर्षक चेहरा, रंगमंच का अनुभव और फिल्मी विरासत।

इतने फिल्मों में काम करने के बावजूद शशि कपूर को आज भी ​सिनेप्रेमी यश चोपड़ा की आइकॉनिक फिल्म ‘दीवार’ में उनके डायलॉग ‘मेरे पास मां है’ के लिए याद करते हैं। दीवार फिल्म में अमिताभ और शशि कपूर के बीच का यह डायलॉग जन-जन की जुबान पर चढ़ गया। फिल्म में विजय के किरदार में अमिताभ कहते हैं, ‘मेरे पास बैंक-बैलेंस है, बंगला है गाड़ी है तु्म्हारे पास क्या है? जवाब में फिल्म में उनके भाई बने इंस्पेक्टर रवि वर्मा यानी शशि कपूर कहते हैं, मेरे पास मां है।’ इस डायलॉग की लोकप्रियता का अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं कि जब मशहूर संगीतकार एआर रहमान ने साल 2009 में ब्रिटिश निर्देशक डैनी बॉयल की फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए आॅस्कर जीता तो मंच से यह डायलॉग दोहराया। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी हिट मानी जाती थी।

पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कोलकाता में हुआ था। साल 2011 में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्हें साल 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह कपूर खानदान में अपने पिता पृथ्वीराज और बड़े भाई राजकपूर के बाद यह सम्मान पाने वाले परिवार के तीसरे सदस्य ​थे।
पृथ्वीराज कपूर के सबसे छोटे बेटे शशि कपूर ने पृथ्वी थिएटर के नाटक ‘शंकुतला’ से अपने करियर की शुरू की थी। राज कपूर की पहली फिल्म ‘आग’ और तीसरी फिल्म ‘आवारा’ में शशि कपूर ने उनके बचपन की भूमिकाएं निभाई थीं। यश चोपड़ा ने फिल्म ‘धर्मपुत्र’ के जरिए शशि को इंडस्ट्री में एंट्री दिलाई थी। शशि कपूर ने अपने करियर में 160 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया।

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ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में भी किया अभिनय

‘धर्मपुत्र’ के बाद शशि ने ‘चारदीवारी’ और ‘प्रेमपत्र’ जैसी असफल फिल्मों में काम किया था। इसके बाद उनकी ‘मेहंदी लगी मेरे हाथ’, ‘मोहब्बत इसको कहते हैं’, ‘नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे’, ‘जुआरी’, ‘कन्यादान’, ‘हसीना मान जाएगी’ जैसी फ़िल्में आई, लेकिन सारी नाकामयाब रही। ‘जब-जब फूल खिले’ फिल्म के जरिए शशि की कामयाबी का सफर शुरू हुआ। यह फिल्म गोल्डन जुबली साबित हुई थी। शशि ऐसे ऐक्टर थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में काम किया था। इनमें ‘द हाउसहोल्डर’, ‘शेक्सपियरवाला’, ‘बॉम्बे टॉकीज’ तथा ‘हिट एंड डस्ट’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

शशि कपूर के व्यक्तित्व का अंदाज तो निराला था ही, उनका अभिनय भी बेजोड़ था। अपने फिल्मी करियर के दौरान उन्होंने राखी, शर्मिला टैगोर, जीनत अमान, हेमा मालिनी, परवीन बाबी, नीतू सिंह और मौसमी चटर्जी समेत कई अभिनेत्रियों के साथ काम किया। नंदा ने एक बार इंटरव्यू के दौरान बताया था कि शशि कपूर उनके फेवरेट एक्टर हैं। अभिनेत्री नंदा के साथ भी उनकी जोड़ी बेहद हिट रही।

समकालीन अभिनेताओं में बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी खूब जमी और दर्शकों द्वारा पसंद की गई। अमिताभ के साथ उन्होंने ‘दीवार’, ‘कभी-कभी’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’, ‘ईमान धरम’, ‘सुहाग’, ‘दो और दो पांच’, ‘शान’, ‘नमक हलाल’ और ‘सिलसिला’ जैसी यादगार फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।

शशि कपूर ने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। कई फिल्मों में तो उन्होंने अपने भाई राज कपूर के साथ काम किया था। खबरों की मानें तो 4 साल की उम्र में शशि कपूर ने पृथ्वीराज कपूर द्वारा बनाए जाने वाले नाटकों और फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। फिल्म ‘आग’ और ‘आवाराज’ में शशि कपूर द्वारा निभाए गए चाइल्ड कैरेक्टर को सबसे ज्यादा पसंद किया गया।

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अपनी अनोखी मुस्कान, अनूठे अंदाज, आकर्षक चेहरे और चॉकलेटी हीरो वाली छवि के साथ ही अपने सदाबहार अभिनय से पर्दे पर छा जाने वाले शशि कपूर के अंदाज की बानगी देखनी हो तो उनकी फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ का गीत ‘एक था गुल और एक थी बुलबुल’ में उनका मुस्कुराता चेहरा ही काफी है।

आकर्षक व्यक्तित्व वाले शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था। बचपन से ही अभिनय के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता की नाट्य मंडली ‘पृथ्वी थियेटर्स’ में मिला। पिता और उनकी नाट्य मंडली के संपर्क में रहते हुए शशि कपूर ने छोटी उम्र से ही अभिनय करना शुरू कर दिया था। शशि ने अभिनय का अपना करियर 1944 में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर के नाटक ‘शकुंतला’ से शुरू किया।
शशि कपूर ने फिल्मों में भी अपने अभिनय की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में आग (1948) और आवारा (1951) में अपने बड़े भाई राज कपूर के बचपन की भूमिका निभाई।

शादी के मामले में भी वह अलग ही निकले। पृथ्वी थिएटर में काम करने के दौरान वह भारत यात्रा पर आए गोदफ्रे कैंडल के थिएटर ग्रुप ‘शेक्सपियेराना’ में शामिल हो गए। थियेटर ग्रुप के साथ काम करते हुए उन्होंने दुनियाभर की यात्राएं कीं और गोदफ्रे की बेटी जेनिफर के साथ कई नाटकों में काम किया। इसी बीच उनका और जेनिफर का प्यार परवान चढ़ा और 20 साल की उम्र में ही उन्होंने खुद से तीन साल बड़ी जेनिफर से शादी कर ली। कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी।

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उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘जब जब फूल खिले’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘कभी-कभी’, ‘आ गले लग जा’, ‘अभिनेत्री’, ‘बसेरा’, ‘बिरादरी’, ‘चार दीवारी’, ‘चोर मचाए शोर’, ‘दीवार’, ‘धर्मपुत्र’, ‘दो और दो पांच’, ‘एक श्रीमान एक श्रीमती’, ‘काला पत्थर’, ‘कलयुग’, ‘क्रांति’, ‘नमक हलाल’, ‘न्यू देहली टाइम्स’, ‘प्रेम पत्र’, ‘प्यार का मौसम’, ‘प्यार किए जा’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘शान’, ‘शर्मीली’, ‘सुहाग’, ‘सिलसिला’, ‘त्रिशूल’, ‘उत्सव’, ‘विजेता’ आदि शामिल हैं।

व्यावसायिक सिनेमा के सफल स्टार शशि कपूर का समानांतर सिनेमा के प्रति भी उतना ही लगता था। इसीलिए बाद में उन्होंने अपने होम प्रोडक्शन शेक्सपीयरवाला के बैनर तले बतौर निर्माता कई समानांतर फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, गोविंद निहलानी, गिरीश कर्नाड जैसे देश के दिग्गज फिल्मकारों के निर्देशन में ‘जूनून’, ‘कलयुग’, ’36 चौरंगी लेन’, ‘उत्सव’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया और एक अलग प्रकार का सिनेमा रचने की कोशिश की। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तो सफल नहीं हुईं, लेकिन इन्हें आलोचकों ने काफी सराहा और ये फिल्में आज भी मील का पत्थर मानी जाती हैं।

शशि कपूर भारत के पहले ऐसे अभिनेताओं में से एक हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश तथा अमेरिकी फिल्मों में भी काम किया। इनमें ‘हाउसहोल्डर’, ‘शेक्सपियर वाला’, ‘बॉम्बे टॉकीज’ और ‘हीट एंड डस्ट’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए साल 2014 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया। अपनी फिल्म ‘जुनून’ के लिए उन्हें बतौर निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, ‘न्यू डेल्ही टाइम्स’ में अपने अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 2011 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान मिला।
इसके अलावा शशि कपूर को फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का, बॉम्बे जर्नलिस्ट एशोसिएशन अवॉर्ड और फिल्म ‘मुहाफिज’ के लिए स्पेशल ज्यूरी का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। साल 1998 में प्रदर्शित फिल्म ‘जिन्ना’ उनके सिने करियर की अंतिम फिल्म मानी जाती है।

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