शास्त्रों में शनिदेव (Lord Shani) की पूजा के दो प्रकार बताए गए हैं। एक वैदिक विधि और दूसरा तांत्रिक विधि। तांत्रिक विधि से की जाने वाली शनिदेव की पूजा कठोर मानी जानी जाती है। यह पूजा केवल शनि मंदिर में ही संपन्न हो सकती है।

शनिदेव (Lord Shani) को समर्पित पूरे भारत वर्ष में चार प्रमुख पीठ हैं। पहला शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र), दूसरा उज्जैन (मध्यप्रदेश) तीसरा पश्चिम बंगाल और चौथा दिल्ली। इन चरों पीठों में सबसे महत्वपूर्ण पीठ इनमे सर्वाधिक महत्वपूर्ण पीठ शनि शिंगणापुर है। शनि शिंगणापुर में शनिदेव की स्वयंभू प्रतिमा विराजमान है। यहाँ शनिदेव की पूजा विशेष विधि-विधान से की जाती है।शनिदेव यहां खुले आकाश के नीचे चबूतरे पर विराजमान हैं।

शनि शिंगणापुर में शनि की विशेष कृपा के कारण घरों में चोरी नहीं होती है। यद्यपि यहां घरों में ताले भी नहीं लगते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां शनिदेव की विधिवत पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं। शनिदेव की पूजा की कुछ प्रमुख विधियां है जिसके आधर पर पूजा करने से शनि से संबंधित दोष साढ़ेसाती आदि खत्म हो जाते हैं।

शनिदेव की पूजा विधि

शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा विधिपूर्वक करने से उसका लाभ मिलता है। साथ ही शनि दोषों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में शनिदेव की पूजा की विधि और मंदिर जाने के कुछ नियमों को बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि शास्त्रों में बताए गए इन नियमों के पालन के साथ शनिदेव की पूजा करने से अत्यधिक लाभ मिलता है।

मंदिर जाने के नियम

शनि मंदिर हमेशा पवित्र मन और स्वच्छ शरीर से ही जाना चाहिए। शनिदेव की पूजन के बाद प्रसाद स्वरुप इलाइची दाना, नारियल और तेल समर्पित करना उत्तम माना गया है। शनिदेव को बेलपत्र और चंदन अति प्रिय है। इसलिए ये दो चीज शनिदेव को समर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं।

शनि मंदिर में शनि के वैदिक मंत्र या तांत्रिक मंत्र का जाप करना अत्यधिक लाभदायक माना जाता है। यदि स्वयं से मंत्र का जाप करना संभव ना हो तो कम से कम आरती में भी सम्मिलित होना चाहिए। शनिदेव की पूजा के बाद उन्हें प्रसाद समर्पित करके खुद ग्रहण करें और अन्य लोगों के बीच भी बंटाना चाहिए। मंदिर से कोई भी प्रतिमा लाकर घर में ना लाएं अथवा लगाएं। दान आदि कार्य भी मंदिर परिसर में ही संपन्न करना चाहिए।

शनि मंदिर नहीं जा पाते हैं तो ऐसे करें पूजा

शनिवार को पीपल की जड़ में तिल युक्त जल से अर्घ्य दें। शनि मंत्र का जाप करें और शनि की स्तुति का पाठ करें। शनि देव के नाम पर घर के पश्चिम दिशा में सरसों का दीपक जलाएं और उसी स्थान पर प्रसाद भोग लगाएं।

शाम को गरीब, बीमार व्यक्ति को भरपेट भोजन कराएं। भोजन में उड़द की दाल और काले चने जरूर शामिल करें। पूजन में काले वस्त्र न धारण करें। केवल लाल वस्त्र धारण करके पूजा सम्पन्न करना चाहिए। केवल शनि के बीज मंत्र को लिखकर टांग सकते हैं।

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