शनिदेव को न्याय के देवता के रूप में माना जाता है लेकिन फिर भी लोगों के मन में शनिदेव की छवि क्रोध बरसाने वाले देवता के रूप में बनी हुई है।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि शनिदेव की साढ़े साती या वक्र दृष्टि।ज्योतिष शास्त्र की मानें, तो व्यक्ति के पूर्व और वर्तमान कर्मों के फलस्वरूप ही किसी के ऊपर शनि की साढ़े साती दशा हावी होती है।वहीं, शनिदेव के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि शनि जिस व्यक्ति से खुश होते हैं, उसकी तरक्की को कोई नहीं रोक सकता है।ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को शांत रखने के लिए कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जिससे कि शनि के प्रभाव को कम किया जा सकता है।जिसमें से एक है शनिवार के दिन खिचड़ी का सेवन।
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शनिवार के दिन उड़द दाल वाली खिचड़ी का सेवन करना अच्छा होता हैं। इससे शनि दोष से राहत मिलती है। यदि जातक नियमित रूप से हर शनिवार को खिचड़ी खाएं, तो शनिदेव की कृपा प्राप्ता कर सफलता की ओर अग्रसर होता है।  जिस तरह शनिदेव को प्रसन्ना करने के लिए उन्हें  सरसों में काला तिल डालकर अर्पित किया जाता है। ठीक उसी तरह काले त‍िल के सेवन से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इसलिए प्रत्येक शनिवार को काला तिल खाना चाहिए।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार को गुलाब जामुन खाने से भी शनिदेव शांत होते हैं।

कौन हैं शनिदेव 
शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया की संतान हैं। पिता सूर्य के द्वारा माता छाया के अपमान के कारण शनिदेव हमेशा अपने पिता सूर्य से बैर भाव रखते हैं। इन्हे सभी ग्रहों में न्याय और कर्म प्रदाता का दर्जा प्राप्त है। मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं। यह बहुत ही धीमी चाल से चलते हैं। यह एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि की महादशा 19 वर्षों तक रहती है। मान्यता है शनि देव जिस किसी पर अपनी तिरछी नजर रख देते हैं उसके बुरे दिन आरंभ हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें उनकी पत्नी ने शाप दिया था जिस कारण से शनि की नजर को बुरा माना जाता है। वहीं अगर शनि की शुभ दृष्टि किसी पर पड़ जाए तो उसका जीवन राजा के समान बीतने लगता है।

Sources:-Hindustan

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