जल्द बदलेगी मुंगेर बंदूक कारखाने की तश्वीर, उद्योग मंत्री शैयद शाहनवाज हुसैन ने किया निरीक्षण

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समय के साथ साथ देश में बहुत कुछ बदला पर नहीं बदली तो मुंगेर के बन्दूक कारखाने तस्वीर. इस बदलते समय के साथ साथ देश के कई उद्योग मंत्रियों ने इस मृतप्रायः पड़े कारखाने का भ्रमण व निरीक्षण भी किया. इसके साथ उन सबने आश्वासन भी दिया. परन्तु इस कारखाने का आजतक कुछ भी नहीं हुआ. लेकिन अब लग रहा है की जल्द ही ऐतिहासिक बंदूक कारखाना के दिन दोबारा बहुरने वाले हें.

वर्षों बाद उद्योग मंत्री शैयद शाहनवाज हुसैन के इस दौरे से यहां के कारखाना प्रबंधकों में थोड़ी उम्मीद कि किरण जगी है कि एक बार फिर इस बंदूक कारखाने के दिन बहुरेंगे और यहां के कारीगरों को रोजगार मिल सकेगा. कारखाना का निरीक्षण करने के बाद कहा बिहार के उद्योग मंतरी सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इस इंडस्ट्री को फिर से जीवित करने की कोशिश की जाएगी. उन्होंने बंदूक कारखाना में बने पम्प गन सहित कई हथियारों का मुआयना कर वहां के कारीगरों कि प्रशंसा की और कहा कि ये काफी कुशल हैं. यहां के कारीगर सीमित साधन में भी बेहतरीन हथियारों का निर्माण करते हैं जो इस जगह की विशेषता है.

शाहनवाज हुसैन ने निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मैं पहली बार मुंगेर के बंदूक कारखान को देखने आया हूं. मुंगेर बंदूक कारखान में निर्मित बंदूक पूरी दुनिया मे मशहूर है, पर इस इंडस्ट्री को काफी मदद की जरूरत है. उद्योग मंत्री ने आगे कहा कि बिहार में पहले से जो भी उद्योग हैं उन्हें आगे बढ़ना है. नए उद्योग लाने हैं और नीतीश कुमार की सरकार में बिहार में उद्योग का जाल बिछाना है.

शाहनवाज हुसैन ने मंगेर बंदूक कारखाना देखने के बाद कहा कि यहां मजदूरों ने दोनाली बंदूक के बाद पहली बार पम्प गन का निर्माण किया है. यहां के कारीगर काफी कुशल हैं. सीमित साधनों में कई चीजों का निर्माण किया है. मैं खुद से इस कारखाने को देखना चाहता था ताकि इसका परफेक्ट प्लान बना कर इसको तरक्की की ओर ले जा सकूं. इस कारखाना को मरने नहीं देना है. शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इसे मदद की जरूरत है, जिसके लिए यहां के प्रबंधकों ने मुझसे मुलाकात की है. उन्होंने अपनी समस्याओं को से मुझे अवगत कराया है. मैंने कारखाना प्रबंधकों को पटना बुलाया है. इस इंडस्ट्री को जीवित करने के लिए मुझसे जहां तक हो सकेगा हर संभव प्रयास करूंगा.

बता दें कि इस ऐतिहासिक बन्दूक कारखाने को आजादी के पूर्व यहां राजा मीर कासिम ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए किला परिसर स्थित मंडल कारा के अंदर स्थापित किया था. जिसे आजादी के बाद भारत सरकार ने किला परिसर स्थित योग आश्रम के बगल में 36 छोटी बड़ी बंदूक निर्माण ईकाइयों को इकठ्ठा कर एक बन्दूक निर्माण कम्पनी की स्थापना कर डाला. तब से लेकर आज तक ये कारखाना बंदूक निर्माण कारखाना के रूप में कार्य करता चला आ रहा है.

 

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