पटना: शिक्षा के दृष्टिकोण से पिछड़ा माना जाने वाला मुजफ्फरपुर के मनियारी थाने का चैनपुर बंगरा गांव निवासी मोटर मैकेनिक गुलाम रसूल के तीसरे पुत्र इसरो में साइंटिस्ट बन कर परिवार और इलाके का मान बढ़ाया। सेल्फ स्टडी के दम पर आईआईटी से एमटेक करने वाले साइंटिस्ट गुलाम सरवर छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। तीन भाईयों और दो बहनों में सबसे छोटा गुलाम सरवर बचपन से ही मेधावी हैं। उन्होंने कहा सच्ची लगन और मेहनत सफलता की कुंजी है।

गांव के एक छोटे से निजी स्कूल से स्कूली शिक्षा के बाद छपड़ा मेघ मठ हाईस्कूल से मैट्रिक किया। अलीगढ़ से 12वीं की और एएमयू से ही बीटेक किया। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर से एमटेक किया और अभी आईआईटी कानपुर से रिसर्च कर रहे थे। इसी बीच इसरो में साइंटिस्ट की प्रतियोगी परीक्षा दी। साइंटिस्ट सी के छह पदों के लिए हजारों मेधावी छात्र कंपीटिशन में शामिल थे। इसमें गुलाम सरवर ने अव्वल रैंक लाया और इंटरव्यू के बाद साइंटिस्ट के लिए चयनित हुए। बीते आठ जुलाई को उन्होंने इसरो के सेटेलाइट सेंटर में साइंटिस्ट सी के पद पर ज्वाइन किया है।

गुलाम सरवर ने स्कूली पढ़ाई से लेकर आईआईटी से एमटेक व रिसर्च करने तक में कोई ट्यूशन या कोचिंग नहीं की। लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सेल्फ स्टडी को ही आधार बनाया। खड़गपुर से एमटेक करने के बाद सवा साल तक गुलाम सरवर ने कलिंगा इंजीनियरिंग कॉलेज में बतौर सहायक प्राध्यापक के रूप में भी छात्रों को इंजीनियरिंग की शिक्षा भी दी। सहायक प्रोफेसर बनने के बाद नेट की परीक्षा में जेआरएफ निकाला। इसके बाद नौकरी छोड़कर फिर से रिसर्च की पढ़ाई कानपुर आईआईटी में शुरू की।

मोटर मैकेनिक पिता के सुपुत्र ने साइंटिस्ट बन कर बढ़ाया परिवार और इलाके का मान

खड़गपुर आईआईटी से किया एमटेक और कानपुर आईआईटी में रिसर्च के दौरान इसरो की प्रतियोगी परीक्षा पास की

कानपुर आईआईटी से रिसर्च करने के दौरान ही इसरो साइंटिस्ट की प्रतियोगिता में प्राप्त की सफलता

छपड़ा मेघ मठ हाईस्कूल से किया मैट्रिक, एएमयू से 12वीं और बीटेक की पढ़ाई की

बेटे की सफलता से पिता गदगद, बोले-सपना पूरा 

बेटे की सफलता से खुश गुलाम रसूल बताते हैं कि एक समय था जब गांव में कोई मैट्रिक पास भी नहीं था। खुद मेरी शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण आठवीं तक ही हो सकी। मोटर मैकेनिक का काम करते हुए कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा इसरो जैसे संस्थान में साइंटिस्ट बनेगा। मां नूरजहां बेगम बेटे की इस कामयाबी पर बताती हैं कि मैंने खुद नहीं पढ़ी लेकिन शुरू से ही इच्छा थी अपने संतानों को जाहिल नहीं रहने दूंगी। गुलाम सरवर के बड़े भाई गुलशाद अहमद पत्रकार हैं। मझले भाई गुलाम रब्बानी निजी बैंक में कार्यरत हैं। दो बहनों में बड़ी बहन यासमीन की शादी हो गई है वहीं दूसरी बहन नासरीन सुरैया एएमयू से रिसर्च कर रही है।

Source: Muzaffarpur Now

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