प्राकृतिक चीजों से बना है ये अनोखा स्कूल

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दरअसल, तमिलनाडु में एक Cuckoo Movement शुरू किया गया है। Cuckoo Movement एक Non-Profit समूह है जो गरीब बच्चों को पढ़ाई करने में मदद करती है। Cuckoo Movement की शुरुआत 2004 में धारापुरम के निकट बसे कीरानुर गांव में बच्चों के लिए छोटी-सी लाइब्रेरी से हुई| इस Movement की शुरुआत कुछ कृषिविशेषज्ञ, पर्यावरण विशेषज्ञ और पत्रकारों ने मिलकर की थी। उस समय इस समूह की योजना सिर्फ़ बच्चों के लिए ऐसे Workshops Organise करने की थी, जिसमें बच्चे अपने कल्पानाओं को पंख दे सकें।

दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में बहुत सारी दिक्कतें आती हैं जिसे देखते हुए Cuckoo Movement से जुड़े लोग ऐसे बच्चों के लिए एक स्कूल बनाना चाहते थे। फिर इन लोगों ने The Cuckoo Forest School बनाया जो मनुष्यों और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर चलता है।
इस स्कूल की Building को सिर्फ प्राकृतिक चीजों से बनाया गया है। 29 मार्च 2017 को इस स्कूल का उद्घाटन किया गया, जिसमें रिबन की जगह नारियल की रस्सी काटी गई। मिट्टी के घर से जिस स्कूल की शुरुआत हुई थी, वो अब एक अच्छी-ख़ासी Building बन गई है। तमिलनाडु ही नहीं, पूरे देश से बच्चे यहां पढ़ने आते हैं।
पढ़ाई के अलावा इस स्कूल में बहुत सारे बच्चे रहते भी हैं। ये एक ऐसा स्कूल है जिसे बच्चे अपना घर कह सकते हैं। कालीश के पिता Underground Cables बिछाने का काम करते थे, और काम करते हुए ही उनकी मौत हो गई थी। मजबूरन कालीश की मां को चेन्नई में मज़दूरी का काम शुरू करना पड़ा। Cuckoo के कारण उसके पास अपना कहने के लिए एक घर है और बहुत कुछ नया सीखने का मौका भी। इस स्कूल में Zen Garden, सब्जियों का किचन गार्डन और मक्के के खेत भी हैं।
Volunteers और Donors के कारण ही Cuckoo ने सपने से लेकर Movement तक का रास्ता तय किया है। हमारी सभी जरूरतों का ख्याल प्रकृति रखती है, तो हमारा भी फर्ज है कि हम प्रकृति का ख्याल रखें। Cuckoo Movement प्रकृति और इंसानों को जोड़ने के लिए भी तत्पर है। इस समूह का लक्ष्य है कि प्रकृति मनुष्यों के लिए सिर्फ़ एक साधन न रहे, बल्कि इंसानों का एक साथी बने। इस समूह से जुड़े लोग मनुष्यों और प्रकृति के बीच दोस्ती की बात करते हैं।

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