छतरी के नीचे खुले में पढ़ने को मज़बूर बच्चे…. क्या ऐसे होगा बिहार का विकास ?

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इस तस्वीर को देखने के बाद आप सोचने पर विवश हो जाएंगे कि यह कौन सा बिहार है। लालू के जंगलराज वाला या नीतीश के सुशासन वाला।

क्या सचमुच बिहार इतना गरीब है ? लेकिन फिर जहाँ एक तरफ सरकारी स्कूलों में छत भी नहीं, वहीँ दूसरी तरफ तमाम प्राइवेट स्कूलों में ऐसी और स्विमिंग पूल जैसी कई सुविधाएँ भी हैं।

राज्य सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है इसका पता इस दो तस्वीर से अपने आप चल रहा है। सवाल है कि आखिर कब तक आब इन बच्चों को उनके उचित अधिकारों से वंचित रखेंगें।

मुजफ्फरपुर.तस्वीर है छपरा रामपुर हरि सरकारी उच्च विद्यालय की। 1945 में स्थापित इस विद्यालय की 9वीं और 10वीं कक्षाओं में 832 स्टूडेंट्स नामांकित हैं।

इनमें 430 छात्र-छात्रा 10वीं के हैं, लेकिन स्कूल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कमरों में छात्र मुश्किल से घुस भी पाएं। ऐसे में उन्हें बाहर ही बैठ कर पढ़ना होता है।

प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि बच्चों को मजबूरी में धूप में बैठकर पढ़ना पड़ता है। ये अपने घरों से छाते-छतरी लेकर आते हैं।

महज पांच शिक्षकों वाले इस स्कूल में एक साथ सवा सौ से डेढ़ सौ तक स्टूडेंट्स बैठ कर पढ़ते हैं। पीछे बैठे बच्चों तक अध्यापकों की आवाज नहीं पहुंचती। इसलिए धीरे-धीरे उनकी उपस्थिति भी कम होती जा रही है।

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