गेरुआ वस्त्र पहन भक्ति में डूबे लोग, सुल्तानगंज में घाटों पर उमड़ी आस्था

आस्था

बारिश के बीच बोल बम के उद्घोष के साथ कांवरियों ने सुल्तानगंज के घाटों से जल उठाया। जहाज घाट और सीढ़ी घाट सभी जगह गंगा की गोद गेरुआ नजर आई।

बम भोले और हर हर महादेव के जयकारों ने मानो फिजां में श्रावणी संगीत घोल दिया हो। भक्तों में बाबाधाम जाने को लेकर गजब का उत्साह नजर आया। सोमवारी के मुकाबले कांवरियों की संख्या मंगलवार को कुछ कम रही।

मेला नियंत्रण कक्ष के अनुसार मेला के तीसरे दिन मंगलवार को 84,053 कांवरियों ने जल उठाया और देवघर रवाना हुए। इनमें सामान्य कांवरियों की संख्या 83,523 थी। इसमें पुरुष 57,602 एवं महिला 25,921 थे। साथ ही 530 डाक कांवरिया भी शामिल थे। इनमें 521 पुरुष और 9 महिला थीं।

शिव की महिमा में रमे भक्तों का अनूठा संगम
जज्बा और जुनून हो तो कोई काम असंभव नहीं है। भगवान शिव की अराधना के लिए भक्त नंगे पांव पथरीले रास्ते पर बिना रुके बढ़े चले जा रहे हैं। थकावट से दूर शिव की महिमा से ओतप्रोत कांवरिये बिहार झारखंड की पथरीली पहाड़ियों को पार कर बाबा को जल चढ़ाने बड़े ही उत्साह के साथ देवघर जा रहे हैं।

इससे पहले कांवरिये सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर जल उठाते हैं। विभिन्न सामाजिक संगठन और आम लोग कांवरियों की सेवा में जुटे हुए हैं। भक्त गेरुआ वस्त्र धारण एकरूपता का परिचय देते हैं। सदियों से जल रही भक्ति की इस जोत को आज भी महसूस किया जा सकता है।

इस तरह का अद्भुत नजारा देखना हो तो इन दिनों सुल्तानगंज आइए। मेले के दौरान देश-विदेश के राजनयिक से लेकर उच्च वर्ग के अधिकारी, पदाधिकारी, मंत्री, व्यवसायी, मध्यम निम्न वर्गीय परिवार के लोग सभी गेरुआ वस्त्र धारण एक रंग में रंगे हुए हैं।

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