सावन में राजगीर की बाबा सिद्धनाथ मंदिर में उमड़ती है भक्तों की भीड़, दर्शन को चढ़नी पड़ती हैं 536 सीढ़ियां

आस्था खबरें बिहार की

बिहार में 14 जुलाई से श्रावणी मेले की शुरुआत होने जा रही है।  सावन में राजगीर की वैभारगिरि पर स्थित जरासंध कालीन बाबा सिद्धनाथ मंदिर में काफी तादाद में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए देश की अलग-अलग जगहों से श्रद्धालु और शिवभक्त आते हैं। इस मंदिर का काफी प्राचीन इतिहास है। द्वापरकालीन मंदिर में कभी मगध सम्राट जरासंध जल चढ़ाया करते थे। ऐसी मान्यता थी कि वे पहाड़ पर स्थित वेल्वाडोब तालाब में स्नान कर वहां से जल लेकर बाबा सिद्धनाथ की पूजा करते थे।

सबसे खास बात है कि मंदिर तक जाने के लिए कुंड के पास से वैभारगिरि पर 536 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। कोरोना के कारण पिछले साल मंदिर में न के बराबर ही शिवभक्त पहुंच पाते थे। इस बार लोगों का हुजूम उमड़ेगा और एक बार फिर से अहले सुबह से ही शिवभक्तों का तांता लगेगा। हजारों साल पुराने इस मंदिर के बारे में ऐसी धारणा है कि यहां पर साधु महात्मा सावन में पूरे माह रात में रहकर साधना करते हैं और दिन में जंगल में चले जाते हैं।

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय बताते हैं कि बाबा सिद्धनाथ एक पौराणिक सिद्धपीठ है। बाबा के दर्शन मात्र से ही मनोरथ पूरे हो जाते हैं। मंदिर तक जाने वाले रास्ते में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। इस कारण बाबा के दर्शन को आने वाले लोगों को सुबह अंधेरा में ही पहाड़ों की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। पहाड़ पर रास्ते में कहीं भी पानी की कोई व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की जाती है। इस कारण आने वाले कांवरियों व आम लोगों के साथ शिव भक्तों को अधिक दामों पर बंद बोतल की पानी खरीद कर पीना पड़ता है।

 

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