सर्दियों में साइनस की समस्या को ऐसे करें हैंडल, रहेंगे और भी कई समस्याओं से दूर

जानकारी

नाक का बंद होना एक आम समस्या है, जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। आमतौर पर घरेलू उपचार के बाद यह परेशानी दूर हो जाती है, लेकिन इसकी वजह से कुछ लोगों को सांस लेने में इतनी तकलीफ होती है कि वे रात को ठीक से सो नहीं पाते। ऐसी ही शारीरिक दशा को साइनस या साइनोसाइटिस कहा जाता है। क्यों होता है ऐसा और इससे कैसे करें बचाव। जानेंगे यहां।

क्या है मर्ज

इस समस्या के असली कारण को जानने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर यह मर्ज क्या है? दरअसल सिर के स्कैल्प की हड्डियों में असंख्य बारीक छिद्र होते हैं, जिनके माध्यम से ब्रेन तक ऑक्सीजन पहुंचती है। इसी वजह से सिर में भारीपन महसूस नहीं होता, लेकिन सर्दी-जुकाम होने की स्थिति में इन छिद्रों में कफ भर जाता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ के साथ सिर में बहुत भारीपन महसूस होता है और इसी समस्या को साइनोसाइटिस कहा जाता है। आमतौर पर सर्दी-जुकाम की समस्या को ठीक होने में कम से कम तीन-चार दिन लग जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को जुकाम बहुत कम होता है या एक-दो दिनों के अंदर ही रनिंग नोज की समस्या दूर हो जाती है। ऐसे में नाक से गंदगी बाहर नहीं निकल पाती और धीरे-धीरे यही कफ के रूप में साइनस की वजह बन जाता है। इसलिए सर्दी-जुकाम की शुरुआत होते ही उसे दावा से रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अन्यथा इससे साइनस हो सकता है।

पहचानें प्रमुख लक्षण

– सिर और आंखों में तेज दर्द

– आवाज में भारीपन

– हल्का बुखार और बेचैनी

– जबड़े, गालों और दांतों में दर्द

– सूंघने की क्षमता प्रभावित होना

– भोजन में अरुचि

– नाक से पानी गिरना और छीकें आना

क्या है वजह

– कुछ लोगों में नाक की हड्डी का आकार अपने आप बढ़ जाता है, जिससे यह समस्या हो सकती है।

– चेहरे या नाक पर गंभीर चोट लगना।

जो लोग किसी खास तरह की एलर्जी के प्रति संवेदनशील होते हैं, उनमें भी साइनस होने की आशंका ज्यादा होती है।

– प्रदूषण भरे माहौल में रहने या ज्यादा मात्रा में सिगरेट पीने वाले लोगों में भी ऐसी समस्या हो जाती है।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

– अपने घर में कार्पेट, डोरमैट, गद्दे और तकिए आदि की नियमित सफाई करें क्योंकि इनमें जमा होने वाले धूलकण से एलर्जी हो सकती है।

किचन में चिमनी लगवाएं। अगर आपको एलर्जी हो तो तेज गंध, परफ्यूम और अगरबत्ती जैसी चीज़ों से दूर रहें। ध्यान रहे आपके घर में क्रॉस वेंटिलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।

– अगर एसी वाले कमरे से निकलकर तेज धूप में जाना हो तो बाहर निकलने के आधे घंटे पहले एसी ऑफ कर दें, वरना तापमान में अचानक आने वाले तेज बदलाव से भी साइनस की समस्या हो सकती है।

– श्वेत रक्त कोशिकाएं बीमारियों से लड़ने का काम करती हैं, लेकिन तनाव की स्थिति में इनकी संख्या घटने लगती है। इसलिए हर हाल में खुश रहने की कोशिश करें।

जिन लोगों को वायरल इंफेक्शन हो, उनसे दूर रहने की कोशिश करें।

– जिन्हें पहले कोविड का संक्रमण हो चुका है, उन्हें सेहत के प्रति खास सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इस संक्रमण के बाद लोगों को फेफड़े कमजोर हो जाते हैं और मामूली सर्दी-जुकाम के बाद भी ऐसे लोगों में साइनस के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है।

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