समस्तीपुर रेल मंडल 1969 में अस्तित्व में आया, ऐतिहासिक यात्रा में यात्रियों के लिए स्थापित किया कीर्तिमान

खबरें बिहार की जानकारी

समस्तीपुर मंडल पूर्वोत्तर रेलवे के एक मंडल के रूप में पांच सितंबर 1969 को अस्तित्व में आया था। आगे चलकर यह तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा द्वारा वर्ष 1996 में नवगठित पूर्व मध्य रेलवे का एक मंडल बना। यह एक नवंबर 2002 से विधिवत परिचालन में आया। समस्तीपुर रेल मंडल ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा में यात्रियों की सुविधा के लिए कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मंडल के लगभग 70 फीसद से अधिक रेलखंडों का विद्युतीकरण हो चुका है। बचे हुए खंडों में कार्य प्रगति पर है। इस मंडल के समस्तीपुर-दरभंगा खंड में रेल दोहरीकरण का कार्य भी प्रगति पर है। सिर्फ समस्तीपुर जंक्शन होकर 120 मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती हैं। इसके अलावा जंक्शन से 45 गुड्स ट्रेनों का आवागमन भी होता है।

समस्तीपुर रेल मंडल पिछले 73 वर्षों के इतिहास में पहली बार काेरोना वायरस के इस वैश्विक महामारी के दौर में कार्य करने तथा रहने के तरीके में काफी बदलाव आया है। आत्म निर्भरता एवं विकास के क्षेत्र में समस्तीपुर मंडल के सभी कर्मियों के दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत, लगनशीलता एवं कार्य कुशलता के परिणाम स्वरूप वर्तमान महामारी के दौर में भी गंभीर चुनौतियों का उत्साह के साथ सामना करते हुए आपदा को अवसर में बदल कर निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया है।

तीन क्षेत्रों के 15 जिलों में मिल रहीं सुविधाएं

समस्तीपुर रेल मंडल मिथिला, चंपारण और कोसी क्षेत्र में अपनी सुविधाएं दे रही है। मिथिला क्षेत्र में समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, चंपारण क्षेत्र में मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली और कोसी क्षेत्र में सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, खगड़िया, बेगूसराय शामिल है।

नेपाल की सीमा से सटा है पांच स्टेशन

इस रेल मंडल के पांच प्रमुख स्टेशन यथा रक्सौल, जयनगर, लौकहाबाजार, बैरगनिया एवं राघोपुर का पड़ोसी देश नेपाल की सीमा से जुड़े होने के कारण इसकी अंतरराष्ट्रीय महत्ता भी बढ़ती है। यह मंडल लगभग 1156 किलोमीटर ट्रैक पर अपने यात्रियों को कुल 90 स्टेशन, 38 हॉल्ट स्टेशन तथा आठ फ्लैग स्टेशनों के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान करता है।

रेल मंडल में आधारभूत संरचनाओं का हुआ विकास

समस्तीपुर मंडल के राघोपुर-ललितपुर ग्राम तथा हसनपुर कुपहा-निर्मली खंड में यात्री गाड़ी संचालन के लिए रेल संरक्षा आयुक्त की स्वीकृति प्राप्त हुई। रक्सौल-सीतामढ़ी खंड में विद्युतीकरण पूरा हुआ। मंडल में अमान परिवर्तन, दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण कार्य त्वरित गति से किया जा रहा है। समस्तीपुर रेलवे चिकित्सालय में आक्सीजन प्लांट लगाया गया। दरभंगा में वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट लगाया गया। क्विट वाटरिंग प्लांट सिस्टम दरभंगा, जयनगर, नरकटियागंज एवं सहरसा में स्थापित किया गया है। जिससे ट्रेन पासिंग में कोच से जल आपूर्ति कम से कम समय में पूरा किया जा सके। आटोमेटिक वाशिंग प्लांट जयनगर एवं सहरसा में स्थापित किया गया है। जिससे कोच की वाशिंग कम से कम समय में हो सके। साथ ही जल की खपत एवं मानव बल का उपयोग कम से कम होगा। मंडल रेल प्रबंधक आलोक अग्रवाल ने बताया कि समस्तीपुर रेल मंडल में लगातार बेहतर कार्य किया जा रहा है। सभी रेल यात्रियों एवं रेल कर्मियों का लगातार सहयोग मिल रहा है। मंडल यात्रियों की सुविधा के लिए प्रयत्नशील है। यात्रियों की निरंतर सुविधा में समस्तीपुर मंडल सतत प्रयत्नशील व उत्तरोत्तर विकास के लिए कटिबद्ध है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.