समस्तीपुर में कौतूहल का विषय बना पीपल के पेड़ में खिला फूल, देखने के लिए जुटी लोगों की भीड़

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उजियारपुर थाना क्षेत्र के सातनपुर माधोडीह गांव स्थित ब्रह्म स्थान परिसर में पीपल के पेड़ पर कमल के समान खिले पुष्प अब भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ हैं। यह फूल रात्रि आठ बजे से चमक के साथ खिलना प्रारम्भ होता है और सुबह रौशनी की धमक के साथ मुरझा जाता है। इस अजूबे आभा बिखेरते पुष्प को देखने ब्रह्म स्थान परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई। हल्के पीले रंग के साथ बिल्कुल ही दूधिया उजले रंग का यह फूल अछ्वुत छंटा बिखेर रहा था।

बताया जाता है कि यह दुर्लभ प्रजाति का फूल है। यह खास कर हिमालय में पाया जाता है। इस फूल का शास्त्रीय नाम वृंदाक है और हिंदी में इसे बांदा कहा जाता है। यह परोपजीवी पौधा है। जिस वृक्ष पर यह पैदा होता है उसी के अनुरूप रस, गुण, ब्रिज, विषाक प्रभाव एवं गुण-धर्म को ग्रहण कर लेता है। इस फूल को स्थलकुमुद के नाम से भी जाना जाता है।

वनस्पति के जानकारों का बताना है कि इसे संरक्षित करने पर बल दिया। यह फूल 80 प्रकार के वात रोगों को दूर करता है। पीलिया, कमला, पांडू बेरी-बेरी, रिकेटी, जोड़ दर्द में भी इसके काढ़ा रामबाण का काम करता है। इतना ही नही सांप के काटने पर इसके कोमल पंखुड़ी कान में लगाने से विष दूर होता है। रात में खिलना और सुबह मुरझाने की प्रक्रिया पर बुजुर्गों का बताना है कि यह चन्द्रमा की शीतलता से जुड़ा हुआ फुल है, इसलिए यह फूल हर हालत में शुभ है। यह औषधीय गुणों से संपन्न है।

जानकर लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया इस फूल को लेकर दी। लोगों ने बताया कि प्रकृति द्वारा मानव को धरती पर भेजने के पहले जड़ी बूटियों को पहले भेजा गया। क्योंकि मनुष्य भी प्रकृति का एक अंग है और मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा प्रकृति ही करती है। हमारे यहां पेड़ पौधे के रूप में बहुत सी चीजें मिली हैं, जो अभी आम लोग तथा डॉक्टरों के जानकारी से ओझल है। आयुर्वेद के नये पुराने डॉक्टर, शोधार्थी इस विषय पर काम करें तो काफी चौंकाने वाले तथ्य उन्हें मिलेंगे।

 

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