रूठा मॉनसून: सावन में भी नहीं हो रही बारिश, यूपी में किसानों के मुर्झाए चेहरे

जानकारी

उत्तर प्रदेश में रूठे मॉनसून से खेतों में खड़े फसल सूखने लगे हैं। बरसात न होने से गन्ना व धान की नर्सरी सूखने लगी है। खेत में नमी न बचने से जमीन फटने लगी है। निराश किसान आसमान में टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं। आषाढ़ माह बीत जाने के बाद सावन में भी बरसात की नहीं हो रही है। मॉनसूनी बारिश न होने से धान की नर्सरी सूखने लगी है। गन्ना फसल पानी के अभाव में पीले पड़ने लगे हैं जिस कारण किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं।

किसानों का कहना है कि मॉनसून के आस में धान की रोपाई तो कर दिया, लेकिन मॉनसून की बेरूखी के चलते लगाई गई धान फसल चौपट होने के कागार पर है। यदि नर्सरी न लगाता तो कुछ पैसे ही बच जाते। गन्ना फसल भी सूखने लगी। किसानों ने बताया कि उनके परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कोई अन्य व्यवस्था नहीं है। पूरी तरह से परिवार कृषि पर ही निर्भर है। यदि बारिश नहीं हुई तो परिवार को भुखमरी का शिकार होना तय है। बावजूद इसके नहर विभाग भी कुंभकर्णी नींद सो रहा है। नहरों में भी पानी नहीं आ रहा। किसान भगवान के भरोसे मॉनसून के इंतजार में आसमान में टकटकी लगाए बैठा हैं।

दिन को बादर करे रात को तारे, चलो कंत जह जीवें वारे
दिन को बादर करे रात को तारे, चलो कंत जंह जीवें वारे। सावन मास बहै पुरवाई, बरधा बेंचि बेसाहो गाई। घाघ की कहावत पर विश्वास करें तो जिले में सूखा पड़ चुका है। फसलों की बुवाई में किसानों की लागत लगभग डूब चुकी है। सिंचाई करके यदि धान उपजाएं तो खेती इतनी महंगी साबित होगी कि दो समय का भोजन मुश्किल हो जाएगा। घाघ ने अपने कहावत में किसानों को सलाह दी है कि सावन माह में वर्षा न हो तो बैल बेचकर गाय खरीद लें।

मौसम वैज्ञानिक से लेकर सरकार तक भले ही पसोपेश में हो, लेकिन महाकवि घाघ की कहावतों को याद करें तो प्रकृति का लक्षण सूखे की सूचना दे रहा है। सावन माह के सात दिन बीत गए, लेकिन बारिश की बूंद भी नहीं आई। अभी खरीफ फसल की दस प्रतिशत भी बुवाई नहीं हुई है। जिन लोगों ने निजी संसाधनों से धान की बेड़न लगा भी ली, अब आसमानी पानी न मिलने से उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। सिंचाई के अभाव में खेतों में दरारें पड़ गई हैं। रोपित किए गए पौधे दरारों के बीच में सूख रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.