रोजी रानी थी ब्रजेश ठाकुर की सबसे बड़ी मददगार!, 11 बार दी थी NGO के हक में रिपोर्ट

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पटना:  बालिका गृह कांड में ब्रजेश ठाकुर की सबसे बड़ी मददगार पदाधिकारी के रूप में बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक रोजी रानी का नाम सामने आया है. समाज कल्याण विभाग की ओर से रोजी रानी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जो पत्र जारी किया गया है उसके अनुसार, मुजफ्फरपुर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 11 बार बालिका गृह का निरीक्षण किया था और हर बार ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ के हक में रिपोर्ट दी थी.

रोजी रानी ने वहां की हर गतिविधियों को सामान्य बताया था. यह बालिका गृह सेवा संकल्प और विकास समिति के अधीन चल रहा था, जिसका संचालक ब्रजेश ठाकुर था.

समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी पत्र में रोजी रानी पर ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ को सेवा विस्तार देने की अनुसंशा का भी आरोप है. साथ ही उनके प्रस्ताव पर एनजीओ को सरकारी मदद भी दी जाती रही. आखिर किन परिस्थितियों में रोजी रानी बालिका गृह को सरकारी मदद देने की अनुसंशा करती रही और उसकी सेवा के विस्तार को लेकर भी अपनी मुहर लगाती रही, इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं.

इन सवालों के जवाब उन्हें विभागीय जांच के दौरान विनोद कुमार ठाकुर को देने हैं, जिन्हें जांच अधिकारी बनाया गया है. विनोद कुमार ठाकुर समाज कल्याण विभाग में सहायक निदेशक हैं. जानकारी के मुताबिक, अगर दस दिनों के भीतर रोजी रानी अपनी सफाई नहीं पेश कर पाती है, तो उनके खिलाफ विभाग की तरफ से एकतरफा कार्रवाई की जाएगी. रोजी रानी के खिलाफ जिस तरह से कार्रवाई की जा रही है, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं.

  • क्या सिर्फ जिला स्तर पर ही बालिका गृह की जांच होती थी? मुख्यालय से कोई अधिकारी जांच के लिए नहीं जाता था?
  • अगर मुख्यालय स्तर से जांच के लिए अधिकारी जाता था या फिर जांच की मॉनिटरिंग होती थी, तो रोजी रानी के साथ संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
  • हर साल लाखों रुपये एनजीओ के दिये जाते रहे, लेकिन क्या मुख्यालय स्तर पर कभी ये पता लगाने की कोशिश नहीं हुई कि वहां किस तरह की सुविधाएं हैं?

TISS की रिपोर्ट को तोड़ा-मरोड़ा गया
रोजी रानी पर कार्रवाई के लिए जो पत्र लिखा गया है उसमें TISS की सामाजिक अकेक्षण का हवाला दिया गया है. इसमें बालिका गृह में रहनेवाली बच्चियों के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट और अन्य अवांछनीय कार्य किये जाने की बात लिखी गई है. टिस की रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि वहां रह रही बच्चियों को यौन प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है. ये बात बच्चियों के मेडिकल रिपोर्ट में भी सामने आयी है. आखिर विभाग की ये से लगातार ये तथ्य छुपाया क्यों जा रहा है? क्या विभाग के अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने के लिए टिस की रिपोर्ट को भी झुठलाना चाहते हैं?

कार्रवाई पत्र में भी गड़बड़ी
मुजफ्फरपुर की निलंबित सहायक निदेशक रोजी रानी पर कार्रवाई के लिए जो पत्र जारी किया गया है. वो दो पेज का है और उसमें भी गड़बड़ी है. इसमें रोजी रानी का मुजफ्फरपुर में कार्यकाल 14 मार्च 2017 से 29 मार्च 2017 दिखाया गया है. पत्र के मुताबिक सिर्फ 15 दिन ही रोजी रानी मुजफ्फरपुर में कार्यरत रहीं. कार्रवाई के पत्र पर संयुक्त निदेशक विजय रंजन के हस्ताक्षर हैं. क्या कोई अधिकारी सिर्फ 15 दिन के कार्यकाल में 11 बार किसी बालिका गृह का निरीक्षण कर सकता है. अगर ये लापरवाही की वजह से हुआ है, तो और भी बड़ा सवाल है. आखिर पत्र जारी करने से पहले ठीक से पढ़ा क्यों नहीं गया? क्या विभाग में काम की ऐसी ही परंपरा रही है? अभी तक जिस तरह से मामले सामने आ रहे हैं, उनसे तो ऐसा ही लगता है. क्या इसके जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिये?

Source: Zee News

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