1800 वर्ग किलोमीटर स्थित रोहतास व कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बिहार का दूसरा टाइगर रिजर्व बनेगा। राज्य में पहले से बेतिया टाइगर रिजर्व है, जहां बाघों की संख्या 40 से अधिक है। कैमूर के जंगल में एक बाघ मिलने के बाद वन विभाग पूरी तैयारी में लग चुका है। वन विभाग के प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट एके पांडे ने कहा कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में एक बाग कैमरे में कैद होने की पुष्टि हुई है।

बेतिया टाइगर रिजर्व से कैमरे लाकर लगाए गए थे। कैमरा अभी कुछ दिनों तक रहेगा। लॉकडाउन खत्म होने के बाद वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को टाइगर रिजर्व घोषित करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को प्रपोजल बनाकर भेजेंगे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। 

पहली बार रोहतास और कैमूर के जंगल में होगी जानवरों की गिनती
रोहतास व कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में जानवरों की गिनती होगी। इसके लिए वन विभाग पहली बार सेंचुरी का सर्वे कराने जा रही है। दो साल के अंदर सर्वे का काम पूरा होगा। सेंचुरी में स्थित जानवरों की अलग-अलग लिस्ट तैयार की जाएगी। इस तरह का सर्वे जंगल में पहले कभी नहीं हुआ है। सर्वे के लिए 1800 वर्ग किलोमीटर जंगल में चप्पे-चप्पे पर कैमरा लगाए जाएंगे। इसके लिए रोहतास डीएफओ जल्द ही प्रपोजल सौंपेगे। रोहतास कैमूर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी उत्तरप्रदेश के जंगलों से जुड़ा हुआ है। 

बाघ के मल की देहरादून लेबोरेटरी में हुई जांच से क्षेत्र में बाघ होने की हुई पुष्टि
चेनारी के औरैंया, भुड़कुड़ा एवं दुर्गावती जलाशय वाले इलाके में पहाड़ी पर नर बाघ के पदचिन्ह देखे गए हैं। सभी जगह पर पंजे के निशान एक ही तरह के हैं। जबकि चेनारी वन्य क्षेत्र में बाघ को देखा भी गया है। रोहतास वन विभाग इस बाघ की ट्रैकिंग की जा रही है। नवंबर को तिलौथू क्षेत्र में पहली बार इस बाघ का मल प्राप्त हुआ था। जिसके बाद बाघ के मल को देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा गया था। जांच के बाद रोहतास वन प्रमंडल के पास आई रिपोर्ट में मल के 6 डीएनए से पता चला कि वह मल बाघ का था। कयास लगाया जा रहा है कि बाघ मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ एवं संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व से कैमूर वन्यप्राणी आश्रयणी में पहुंचा था।


जानवरों की संख्या सहित अन्य आंकड़े जुटा रहे
रोहतास वन प्रमंडल द्वारा कैमूर वाइल्डलाइफ सेंचुरी में मौजूद जानवरों की संख्या की जानकारी सहित अन्य आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। ये आंकड़े राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनसीटीए) को भेजे जाएंगे। सभी तथ्यों को अनुकूल पाए जाने और उस पर केंद्र सरकार की सहमति के बाद इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया जाएगा। ऐसा होने पर यह क्षेत्र भी इको टूरिज्म के तौर पर विकसित हो सकेगा।

Sources:-Dainik Bhasakar

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