कनाडा मे भी छाये है बिहारी गुरू आर के श्रीवास्तव, ओलम्पिक पदक विजेता योगेस्वर दत्त ने भी की तारीफ

बिहारी जुनून

ओलम्पिक पदक विजेता योगेस्वर दत्त ने बिहार के चर्चित मैथमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तव को अपने राज्य हरियाणा के नन्हे से बालक देश का गौरव गुगल ब्वाय कौटिल्य के गुरू के रूप मे उच्च शिक्षा देने के लिए बधाई दिया। तथा आर के श्रीवास्तव के द्वारा चलाया जा रहा अभियान आर्थिक रूप से गरीबों की नहीं रूकेगी पढ़ाई को योगेश्वर दत ने खूब सराहा।

मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव ने देश की मान सम्मान को विश्व पटल पर बढ़ाकर देश मे ओलम्पिक पदक लाने हेतु योगेश्वर दत को बधाई दिया।

आर के श्रीवास्तव ने बताया की योगेस्वर दत्त जी बहुत ही अच्छे इंसान है। बातचीत करके बहुत ही अच्छा लगा। बेहतर स्वागत और मेहमान नवाजी के लिए योगेस्वर जी का बहुत धन्यवाद।

छोटे शहर के बड़े सपने-

आज आपको हम ऐसे बिहारी प्रतिभा से रूबरू करा रहे है जिनपर बिहार सहित पूरा देश करता है गर्व।

जी हाॅ हम आपको बिहार के रोहतास जिला के बिक्रमगंज के साधारण घर मे जन्म लिए उस विलक्षण प्रतिभा के बारे मे बताने जा रहे जो आज आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेन्टस के लिए मसीहा बन चुका है।

जिसे पूरा बिहार गरीबो का मसीहा कह रहा है। जिसने सब्जी बिक्रेता, गरीब किसान , पान बिक्रेता, भूमीहीन मजदूर आदि के बच्चों को देश के प्रतिष्ठित इंजीनियर काॅलेजो आइआइटी, एनआइटी, बीसीईसीई आदि सहित एनडीए मे बेहतर रैक के साथ निःशुल्क शिक्षा देकर पहुँचाया।

जिस बिहारी गुरू के बारे मे आपको हम बता रहे है वह विश्व प्रसिद्ध गुगल ब्वाय कौटिल्य पंडित के भी गुरू बन चुके है। विश्व के श्रेष्ठ 10 जीनीयस बच्चों मे टाॅप पर कौटिल्य का नाम शुमार है।

जिसे उच्च शिक्षा देते है देश मे मैथेमेटिक्स गुरू के नाम से मशहूर बिहार के शान आर के श्रीवास्तव। आपको बताते चले की मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के गणित पढ़ाने के तरीके के दिवाने बच्चे सहित शिक्षक भी हो चुके है।

आज देश के अन्य राज्यो के शिक्षक मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के गणित पढ़ाने के तरीके के कायल तो बन ही चुके है वह आर के श्रीवास्तव के पढ़ाने के तरीके को अपनाकर खुद पढ़ाने के लिए प्रयोग मे ला रहे है।

जिससे कमजोर से कमजोर स्टूडेन्टस मैथेमेटिक्स को मैजिक की तरह सीख पा रहे है।

 

कनाडा मे भी छा गया है बिहारी गुरू –

भारतीय मूल के कनाडाई शिक्षाविद भी आर के श्रीवास्तव के गणित पढ़ाने के तरीके के दिवाने बन चुके है।

क्या कहते है विदेशी शिक्षाविद -कनाडा मे रह रहे बिहारी सहित भारतमूल के लोग मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के मैथ पढ़ाने के तरीके से अन्य शिक्षको को सीख लेने की सलाह नही दिया बल्कि उनसे आग्रह किया की आप सभी कभी आर के श्रीवास्तव के क्लास मे पढ़ाने के तरीके को देखे और उसे अपनाये।

आप कितने बड़े ज्ञानी है यह मायने नही रखता आप अपने ज्ञान को अधिक से अधिक कहाँ तक पहुँचा पाते हो कितने अधिक बच्चों को सीखा पाते हो यह अधिक मायने रखता है।

आर के श्रीवास्तव की सबसे बड़ी खुबी यह है की यदि कोई बच्चा जो सपना देखता है की हमे डाॅक्टर बनना है परन्तु गल्ती से कभी आर के श्रीवास्तव के मैथ टीचीग क्लास मे बैठ जाता है उसके बाद गणित से उसकी रूची ऐसे बढ जाता है की वह बच्चा अब डाॅक्टर से इंजीनियर बनने का सपना देखने लगता है। आप समझ सकते है की सिर्फ एक क्लास के कुछ घंटे पढ़ने से इतने रूची बच्चों मे आने लगते है तो आप समझ सकते है पढ़ाने का तरीका कितना जबरदस्त होगा।

कौन है मैथेमैटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव

– देश के प्रतिष्ठित प्रिंट मीडिया सहित इलेक्ट्रॉनिक सह सोशल मीडिया मे पिछले कुछ वर्षों से मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के नाम से मशहूर आर के श्रीवास्तव के द्वारा आर्थिक रूप से गरीबों की नहीं रूकेगी पढ़ाई अभियान चलाया जा रहा है जिसका लाभ से आज काफी गरीब बच्चे आइआइटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानो मे जा चुके है।

बिक्रमगंज जैसे एक छोटे से शहर के आर के श्रीवास्तवा ने इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्रों के नन्हे सपनो को साकार करने की जदोजहद में लगे। आर के श्रीवास्तव की जिंदगी भी कम दिलचस्प नही है।

बचपन के 5 वे साल में पिता पारसनाथ लाल के गुजरने से अनाथ हुए श्रीवास्तव को युवा अवस्था में भी एक जोरदार का झटका लगा .पिता के स्थान पर बड़े भाई शिव कुमार श्रीवास्तव का भी साथ 2014 में छूट गया जब उनकी हो गई पिता की मृत्यु से गांव राजपुर जमोढ़ी को छोड़ बिक्रमगंज बसा परिवार कभी कड़ी मुश्किलों से गुजर चुका है।

आज इनके कड़े परिश्रम और गणित के प्रति लगाव से आर के श्रीवास्तव भी एक ब्रांड बनने की राह पर अग्रसर है। देश के प्रतिष्ठित लोग भी श्रीवास्तव का लोहा मान चुके है तथा मैथेमेटिक्स गुरू के आर्थिक रूप से गरीबों के नही रूकेगी पढ़ाई अभियान की सभी ने सराहना भी किया।

देश के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविद , उतराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत , बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी
उतराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत , प्रख्यात शिक्षाविद राज्यसभा सांसद आदरणीय आर के सिन्हा , देश के वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री रामबहादुर राय , बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम जी , देश के द्वितीय प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के पुत्रवधू नीरा शास्त्री से लेकर देश के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह

सभी ने मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव को सम्मानित कर उनके द्वारा शिक्षा मे दिये जा रहे निरंतर कार्यों की सराहना किया तथा मैथेमेटिक्स गुरू आर के श्रीवास्तव के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ सभी ने दिया।

आर के श्रीवास्तव ने देश के पाठ्यक्रम मे सुधार को लेकर कई बार अपने बाते रख चुके है। आर के श्रीवास्तव बेहतर शिक्षा हेतू देश मे नई शिक्षा पद्धति लाने की बातों को हमेशा मीडिया से चर्चा के उपरांत जरूर कहते।

समाज भी समझे जिम्मेदारी – मैथेमेटिक्स गुरू

हर अभिभावक यह तो चाहता है की उसके बच्चे को अच्छे शिक्षक मिले, लेकिन वह यह नही चाहता की उसका बच्चा अच्छा शिक्षक बने। वह अपने बच्चे को डाॅक्टर , इंजीनियर या आइएएस बनाना चाहता है।

शिक्षा की गुणवता के लिए सरकारो के साथ सामाजिक स्तर पर भी काम किये जाने की जरूरत है। समाज को बेहतर शिक्षक तैयार करने होगे। इस मामले मे हम चीन और रूस का उदाहरण ले सकते है।

रूस बर्बाद होने के बाद अपनी बेहतर शिक्षा प्रणाली के दम पर उबर गया। चीन की शिक्षा प्रणाली भी काफी गुणवतापूर्ण है। चीन के बच्चे लगातार इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड जीत रहे है।

गरीब से एक विकसित राष्ट्र बनने के पीछे उसके गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली है।वहाँ के सरकारी स्कूलो मे यहाँ के नीची स्कूलो से बेहतर शिक्षा दिया जाता है।

देश का पूरा भविष्य पूरी तरह शिक्षा और उसके गुणवत्ता पर निर्भर है।सम्पूर्ण साक्षरता जरूरी है परन्तु उससे अधिक जरूरी है गुणवता शिक्षा। सिर्फ साक्षर बना देने से बहुत अच्छा परिणाम नही मिल सकता।

देश मे बदलाव और बिकास केवल साक्षर बना देने से नही हो सकता। यह बेहतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दम पर होगा।हमलोग बार- बार सवाल उठाते है की हमारे यहाँ नोबेल पुरस्कार विजेता क्यो नही होते?

हमारे संस्थानो मे कोई कमी नही है। कमी है तो केवल बुनियादी शिक्षा मे है।सिर्फ साक्षर बनाने की जगह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान देंगे तो हमारे यहाँ भी नोबेल पुरस्कार लगातार आयेगा।

मै हमेशा कहता रहता हूँ जब मेरा मिटिग मंत्री , वरिष्ठ अधिकारियो से होता है की देश की शिक्षा प्रणाली पुरानी हो चुकी है। इसमे पाठ्यक्रम से लेकर शिक्षक तक की बात शामिल है।

स्कूलो मे बच्चो को इस तरह पढ़ाया जा रहा है उसके शिक्षा मे रूची बढ़ने क बजायेे और अरुचि बढेगी। बच्चो को क्यो और कैसे के आधार पर शिक्षा देने की जरूरत है। उनमे सोचने और तर्क करने की क्षमता बिकसीत करनी होगी।

 

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