इस दुनिया में कुछ नाम बनते ही हैं औरों के खातिर जीने केलिए । ऐसा ही एक नाम है श्रीमती रितु जयसवाल जी का । भारत नेपाक सीमा से सटे है माता सीता की जन्मभूमि सीतामढ़ी का एक प्रखंड सोनबरसा और इसी प्रखंड का एक छोटा सा हिस्सा है ग्राम पंचायत राज सिंहवाहिनी ।
नाम का तो मतलब बनता है सिंह को वहन करने वाली (माँ दुर्गा), पर हकीकत में बमुश्किल साल भर पहले तक यह जगह आपको 100 साल पहले के भारत की याद दिलाता था । नेपाल से आने वाली अधवारा नदी पंचायत को 2 हिस्सों में बांटती है | एक हिस्से का कुछ भाग तो कुछ हद अक ठीक था पर बाकी का बड़ा हिस्सा । हद से ज्यादा जर्जर सडकें, न बिजली न शिक्षा और न बदलाव की एक अदनी सी उम्मीद ।
जहाँ 95 % लोग शौच केलिए खुले में जाते थे उस जगह पर व्यवहार परिवर्तन या विकास के किसी और विषय पर बात करना बेमानी ही थी । तब इस जगह पर पदार्पण हुआ इसी पंचायत के नरकटिया गाँव की एक बहु रितु जयसवाल का जिनसे आज बिहार ही, नहीं देश के कई भागों के लोग भली भाँती परिचित हैं ।
शादी के 17 सालों के बाद सालों बाद अचानक उन्होनें अपने पति श्री अरुण कुमार (1995 बैच आई.ए.एस, अलाइड अधिकारी) से आग्रह किया की उन्हें अपना पैतृक स्वसुराल देखना है । शुरू से ही ऊँचे खानदान में पलने बढ़ने वाली रितु को गाँव की तकलीफों का ज़रा भी अंदाजा कहाँ था ।


उन्होंने तो यह सोंचा की प्यारा सा गाँव होगा, फलदार वृक्ष होंगे, खुशहाली होगी पर इन सब से उलट जब उनके पैर सिंहवाहिनी की धरती पर पड़े तब उन खड्डों से भरे फिसलन वाली मिट्टी की पगडंडियों से उठे कहाँ ! वो कीचड़ युक्त गन्दी सडकें, गन्दगी से बजबजाती हुई नालियाँ, घूप अँधेरा, अँधेरे में कमर तक पानी में घुस कर, फिर बैलगाड़ी की सवारी करती शहरी ऐशोआराम से दूर एक महिला आखिरकार अपने गाँव पहुंची । बस यहीं से क्रांतिकारी बदलाव और सफलता के एक लम्बे सफ़र की शुरुआत हो गई।




अपने गाँव नरकटिया के बद्तर हालात ने रितु को अन्दर से झकझोर दिया । हालात ऐसे थे की एक बार अच्छे से बारिश हो जाए तो पूरा गाँव टापू बन कर रह जाता था । न कोई आ सकता था न जा सकता था । शिक्षा के हालात ऐसे की गाँव की एक भी लड़की दसवीं पास तक नहीं थी । इन्ही हालातों में रितु ने गाँव में रह कर तस्वीर बदलने की ठानी और लग गईं सर्वप्रथम गाँव में बिजली लाने में ।


आवेदनों का सिलसिला चला, रात दिन की भाग्दौर हुई तब पता चला कागजों में तो पूरा पंचायत ही विद्युतिकृत था, अर्चनें आती गईं पर सभी अर्चनों को पार कर आखिरकार बिजली के तार तन गए और गाँव के कई बुजुर्गों ने जीवन में पहली बार बिजली के बल्ब जलते देखा । सरकारी विद्यालय तो राम भरोसे था ही तो अब बारी थी बच्चों में शिक्षा का अलख जगाने की ।




विभिन्न संथाओं को संपर्क साधने का सिलसिला शुरू हुआ और नतीजा, की सैकरों बच्चों ने आउट ऑफ़ सकुल शिक्षा ग्रहण किया स्मार्ट क्लासेज के माध्यम से, लड़कियों का, कंप्यूटर शिक्षा, सिलाई का प्रशिक्षण जैसी तकनीक से ज्ञानवर्धन किया गया, लोगों को प्रेरक वीडियोज़ दिखा, कर सभाएं कर के अपने अधिकारों को ले कर जागरूक किया गया । यह सब चल ही रहा था की साल 2016 में आया ग्राम पंचायत का चुनाव ।


लोगों ने रितु के सेवाभाव को महसूस किया और सब ने एकमत हो कर इच्छा जताई की वे पंचायत चुनाव में मुखिया पड़ की एक प्रत्याशी हों । उन्होंने साफ़ कहा की वो अपने गाँव के लिए वहां आई थी पर लोगों ने उनकी एक न सुनी । और फिर क्या ! जल्दी जल्दी नामांकन भरे गए और इस नामांकन के भरे जाने के साथ ही जहाँ उमीद्वारों की संख्या 35 थी वो घट कर 5 पर आ गई । सफलता की पहली सीढ़ी तो इसी दिन पार कर ली गई थी ।




रात दिन चुनाव प्रचार में बीतता गया । प्रचार के दौरान ही रितु ने आने वाले दिन के हालात के संकेत दे दिए थे । जिस पंचायत को जात पात की मोटी मोटी जंजीरों ने सर से ले कर पाँव तक जकड़ रखा था उन बेड़ियों की पकड़ ढीली पड़ने लगी जब चुनाव के दौरान ही तपती धुप में रितु के साथ खड़ी एक राजपूत और एक मुसहर समाज की महिला को प्यास लगी तो इन्होने मुसहर समाज की महिला को अपने बोतल से पानी पिलाया और जब वही बोतल राजपूत समाज की महिला की ओर बढ़ाया गया तो वो पीने से कतराई ।


इस पर रितु ने कहा, “प्यास, गरीबी इन सब की कोई जात नहीं होती । यहाँ हम सब की एक जात है । हम तीनो प्यासे हैं ।” और फिर तीनो ने एक ही बोतल से पानी पिया । चुनाव के नतीजे आये, लोगों के उम्मीदों के आगे पैसों के लालच ने घुटने टेक दिए । श्रीमती रितु जयसवाल जी 1853 वोटों से विजयी घोषित हुईं ।




विजय के बाद सीतामढ़ी का एअरपोर्ट मैदान के बाहर भीड़ में सिर्फ इन्ही के चर्चे थे । दुसरे पंचायत के लोगों की रूचि भी सिंहवाहिनी पंचायत के नतीजे में ज्यादा थी क्योंकि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था की एक इतने वरिष्ठ पदाधिकारी की पत्नी पंचायत चुनाव जैसे छोटे स्तर पर लड़ रही थी । इसलिए आशाएं तो लाज़मी थी ।


कोई भी पद साथ में चुनौतियों और जिम्मेदारियों को ले कर आता है । यही रितु के साथ भी हुआ | 3 जुलाई 2016 को उन्होंने पंचायत की मुखिया के रूप में बागडोर संभाला । समस्याएं असंख्य थी, पर उन्होनें सोंचा की बिजली और सड़क ही नहीं होगी तो बाकी चीज़ें आएँगी कैसे । इसलिए उन्होनें सर्वप्रथम बिजली लाने पर जोर दिया । इसके लिए ग्राम स्तर की कमिटियाँ बनी ।




पंचायत के लोगों ने भी सरकारी विभाग का भरपूर सहयोग किया और देखते देखते हर टोले कसबे में कुछ महीनों के अन्दर ही विद्युतीकरण का कार्य संपन्न हुआ । अब बारी थी पंचायत के एक गाँव खुटहा पश्चिमी की जहाँ उस दिन तक एक पैसे का सरकारी कार्य नहीं हुआ था । सड़क पर हर कदम पर विवाद था जिसके वजह से ज़िन्दगी नरक से भी बद्दतर थी ।


अपने कार्यकाल के पहले ग्राम सभा में इन्होने सीधा एलान किया, “चाहे जैसे भी हो, पहला काम खुटहा की सड़क बनाकर होगा नहीं तो पुरे पंचायत में 5 साल कोई काम नहीं होगा ।” कुछ समय लगा और ठोस पी.सी.सी. सडकें बनी ।
अपने इस एक साल के कार्यकाल में मुखिया रितु जयसवाल ने सड़क विहीन पंचायत में बुद्धिजीवी ग्रामीणों की मदद और अपने सूझ बुझ से हर कदम पर होने वाले विवादों को सुलझाते हुए जिला से ले कर दिल्ली तक के अधिकारियों से मिल कर उनके माध्यम से विभिन्न योजनाओं से कुल 5075 फीट पी.सी.सी सड़क का निर्माण करवाया ।


इसके अलावा प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना से कुल 6,162 मीटर लम्बी एवं 16 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण का कार्य संपन्न होने को है । जिस पंचायत के एक छोड़ से दुसरे छोड़ तक पहुचने में 1.5 घंटे लगते थे, वो दूरी इनकी कोशिशों से अब मात्र 15 से 20 मिनट की रह गई है । इसके अलावा आई.ए.पी योजना से 47 लाख के लागत से एक पुल का निर्माण हुआ जो सिंहवाहिनी को पास के गाँव लपटाहाँ से जोडती है । इस पुल के बन जाने से 6 किलोमीटर का लम्बा सफ़र मात्र 700 मीटर का रह गया ।




जहाँ हैण्ड पंप व्यक्तिगत वितरण की सामग्री के रूप में जाना जाता था उसे 20 सार्वजनिक जगहों को चुन कर अधिष्ठापित किया गया । शिक्षा के क्षेत्र में तक़रीबन 500 बच्चों को आउट ऑफ़ स्कुल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इनकी ओर से दी जारी रही है । स्वास्थ, दन्त जाँच, आर्गेनिक फार्मिंग जैसे विषयों पर आये दिन पंचायत में किसी न किसी माध्यम से रितु जी शिविर लगवाती रहती हैं । सब से अहम् कार्य जो हुआ वो है, पंचायत का खुले में शौच से मुक्त होना ।


ये जगह ऐसी थी जहाँ की 95 प्रतिशत जनता खुले में शौच को जाती थी । गहराई तक जागरूकता फैला कर एक आन्दोलन के तहत तक़रीबन 2000 शौचालय का निर्माण करा पंचायत को इस अभिशाप से मुक्त कराने का श्रेय ग्राम वासियों का कुशल नेतृत्व करने वाली रितु को जाता है ।

 




इन सभी सरकारी योजनाओं से अलग सिंहवाहिनी की मुखिया रितु जयसवाल दिल्ली के आरोह फाउंडेशन के माध्यम से, अभी अपने पंचायत ही नहीं, आस पास के 6 पंचायतों में अभूतपूर्व कार्य करवा रही हैं जिनमें प्रमुख हैं 340 अत्याधुनिक सोलर स्ट्रीट लाइट का अधिष्ठापन, 10,000 लीटर की क्षमता वाले 53 पानी की टंकी के साथ उतने ही सोलर वाटर पंप का अधिष्ठापन और तीसरी योजना में खुले में शौच मुक्त हो चुके पंचायतों में फैले हुए गरीब परिवारों के कुछ छुटे हुए घरों में शौचालय निर्माण कार्य जिसकी कुल संख्या 1075 हैं |


इन योजनाओं का कार्य बेहद ही तीव्र गति से चल रहा है और आने वाले जुलाई महीने के अंत तक संभवतः संपन्न हो जाएगा । सरकारी योजनाओं को छोड़ दें तो कुल 7 करोड़ की राशि की ये योजनाएं तो बस इनके 1 साल के कार्यकाल की एक पहली झलक है ।



रितु कहती हैं “अभी आगे और कई विकास कार्य होने बाकी हैं पर शिक्षा बिना सब बेकार है, पर विडम्बना यह है की इसी विभाग की हालत सर्वाधिक दयनीय हैं । शिक्षा व्यवस्था से कुंठित हो जाती हूँ तो कहीं न कहीं इसी लाचार तंत्र में सोनबरसा प्रखंड के ही इन्दरवा विद्यालय की बेहतरीन व्यवस्था और भिखारी महतो जी जैसे शिक्षक की कार्यकुशलता हिम्मत बनाए रखने को मजबूर कर देती है |”


उनसे उनके सपने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने चुनाव जीतने के बाद जो व्याख्यान दिया था उसकी बातें दोहराई, “कास्ट फ्री ! करप्शन फ्री ! क्राइम फ्री समाज का सपना देखती हूँ ।” तीन C से मुक्ति ।

 



एक व्यक्ति अपनी सफलता के लिए कार्य करता है पर कोई अपनी नहीं गाँव समाज और दबे कुचले लोगों के उत्थान और उनकी सफलता के लिए जीता है और असल में ऐसा ही इंसान सबसे सफल और महान कहलाता है ।
ऐसी ही एक सफल क्रांतिकारी महिला है मुखिया रितु जयसवाल जिनको उनके कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर हमारी टीम बधाई देती है और आने वाले समय केलिए शुभकामनायें देती है।

 

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