Ritu

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए निकली मुखिया Ritu Jaiswal

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सीतामढ़ी के सिंहवाहिनी पंचायत की Ritu Jaiswal एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने बिहार में जनप्रतिनिधियों की तस्वीर बदल दी है। मुखिया बनने के बाद Ritu ने सिंहवाहिनी पंचायत का काया-कल्प कर दिया।

शादी के 17 साल बाद जब वो अपने ससुराल लौटी तो गांव की हालत देख इतनी व्यथित हुईं कि बदलाव लाने के लिए सोचने लगीं। गांव के हालात देख कर उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वो प्रेमचंद की कहानी में पहुंच गई है।

दूसरे लोगों की तरह नजरअंदाज करने के जगह ऋतु ने गांव में बदलाव लाने की ठानी और बिहार के सीतामढ़ी के सोनवर्षा प्रखंड के सिंघवाहिनी पंचायत से मुखिया पद पर जीत हासिल कर इस गांव को चर्चा में ला दिया। आज एक बार फिर जब पंचायत पर बाढ़ का कहर टूटा है वो निकल पड़ी हैं लोगों की मदद करने।




ritu mukhiya

इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है। आज जन्माष्टमी है। और जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारा पंचायत सिंहवाहिनी पूर्णतः बाढ़ की चपेट में है। हमारा सड़क मार्ग से संपर्क तक बाहरी दुनिया से टूट चुका है। नीचे से ले कर ऊपर तक सब से मदद मांग चुकी पर शायद सरकार के पास हम गाँव वालों के लिए मदद के लिए कोई राशि नही बची है।

क्योंकि 2 दिन से सिर्फ आश्वासन ही मिल पाया है। इस खतरे को भांपते हुए हमने मुखिया बनते ही साल भर पहले ही नाव की भी मांग की थी जो 2 महीने पहले आवंटित होने के बाद भी आज तक नही मिली।




अफसर पास के पंचायत तक आ जाते हैं और हमारे यहां सड़क मार्ग बाधित हो जाने की वजह से नही पहुंचते। वहीं दूसरी ओर हमें कहा जाता है कि आकर अपना चूड़ा, गुड़ और नाव ले जाइए।

आप नही पहुंच पाए फिर हम कैसे आ पाएंगे। खैर! पूरा ज़िला है तकलीफ में। कहां -कहां कितनों की मदद हो पाएगी। सुबह प्रखंड कार्यालय से बताया गया कि 2 बोरी चूड़ा भेजा जा रहा है हमारे पंचायत के लिए। अब भला बाढ़ प्रभावित सैकड़ों लोगों के लिए 2 बोरी चूड़ा कहां तक उचित है।




तो हमने ऐसी मदद नहीं लेने का फैसला किया है। हमारी मांग है कि जिन गरीब, दिन दुखियों के घर इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं, जो बेघर हो गए हैं, उनके पुनर्वास के लिए सरकार शीघ्र व्यवस्था करे।

जहां तक खाद्य सामग्री की बात थी तो अपने स्तर से हम गांववालों ने जहां जिसके पास जो भी, जितनी भी खाद्य सामग्री थी, उसे इकट्ठा कर के ज़रूरतमंदों के बीच वितरित करना शुरू कर दिया है।




हमारे घर से लेकर विद्यालय तक सब राहत शिविर में तब्दील हो चुके हैं। इस दुख की घड़ी में हम सब मिल कर तकलीफों से लड़ते हुए एक दूसरे की मदद कर रहे।




















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