जो काम व्यवस्था को करनी चाहिये वो कर रहा बिहार का एक युवा, बच्चों को शिक्षा और भूखों को रोटी

एक बिहारी सब पर भारी प्रेरणादायक

आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश और राज्य में बुनियादी समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम रही है। लेकिन जो काम हमारे राज्य की व्यवस्था को करनी चाहिये थी वो काम हमारे बिहार का एक युवा कर रहा है। जी, हम बात कर रहे हैं पटना के “ज्ञानशाला” और “रोटी बैंक” के संचालक ऋषिकेश नारायण सिंह की।

एक तरफ जहाँ आज भी हजारों लोग भूखे सो जाते हैं, दूसरी तरफ पटना शहर का एक युवा जो न सिर्फ ‘ज्ञानशाला’ के जरिये गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि हर रात काली अंधेरी सड़कों पर फुटपाथ पर सोये उन सैकड़ों गरीबों तक खाना पहुंचाने निकल जाता है। स्वयंसेवी संस्था ‘बिहार यूथ फोर्स’ के जरिये ऋषिकेश नारायण सिंह ने युवाओं की एक टीम बनायी है और हर रोज घर-घर जाकर खाना संग्रह करते हैं, जिसका नाम उन्होंने ‘रोटी बैंक’ रखा है।

लोग उनकी इस भावना को देखते हुए उसकी मदद भी करते हैं और फिर वह उस खाने को जरूरतमंद व भूखे लोगों तक पहुंचाने के लिए निकल जाते हैं। दूसरी तरफ हर दिन यहां तक कि रविवार को भी वह अपनी युवाओं की टीम के सहयोग से पीएमसीएच के पास स्थित स्लम बस्ती एवं शास्त्री नगर स्लम बस्ती में अपने छोटे से स्कूल ‘ज्ञानशाला’ में गरीब बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते हैं।

यहाँ 150 से अधिक बच्चे शाम को 03 बजे के बाद शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। उन्हें गलत संगत से बचाना और अच्छाई की ओर ले जाना इस युवा का उद्देश्य है। ये करीब तीन-चार वर्षों से इस काम में लगे हुए हैं। उन्होंने एक बुक बैंक भी खोला है, जहां वो पुरानी किताबों का संग्रह करते हैं और फिर गरीब बच्चों को पढ़ने के लिए देते हैं। कई लोग उसमें नए-पुराने किताब डोनेट करते हैं।


ऋषिकेश का मानना है कि बच्चों की शिक्षा ही उन्हें देश और समाज के मुख्यधारा में लाने का काम करती है। इसी उद्देश्य के साथ ही वो हर दिन अपने इस काम में लगे रहते हैं। रोटी बैंक के माध्यम से ऋषिकेश जाड़ा, गर्मी या बरसात हर रात को शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर वहाँ फुटपाथ पर सोये गरीबों को खाना खिलाते हैं। ऋषिकेश जिस तरह से एक बड़ी दायित्व का निर्वहण कर रहे हैं, वो पूरे बिहार के युवाओं के लिये प्रेरणास्त्रोत बनकर उभरे हैं।

ऋषिकेश को उनके इस बड़े काम के लिये कई तरह के सम्मान भी मिले हैं जिसमें गोवा की राज्यपाल से इस कार्य के लििये मिला सम्मान मुख्य है।

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