मोदी सरकार ने केंद्र सरकार के 312 कर्मचारियों को काम में लापरवाही बरतने को लेकर नौकरी से हटा दिया है. सरकार ने इन अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है. इसमें कई सीनियर अधिकारी हैं, ज्वाइंट सेक्ट्रेरी रैंक के अधिकारियो को भी हटाया गया है. सरकार ने ग्रुप बी के 187 कर्मचारियों को हटाया गया है, ग्रुप ए के 125 अफसर जबरन रिटायर कर दिया है.

ऐसा बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार की इन अधिकारियों पर यह कार्रवाई सार्वजनिक हित को देखते हुए सत्यनिष्ठा की कमी और लापरवाही दिखाने के चलते की गई है. जुलाई 2014 से मई 2019 तक हुए इस रिव्यू में ग्रुप ए के कुल 36000 और ग्रुप बी के 82000 अफसरों को आंका गया. इनमें से ग्रुप ए के 125 और ग्रुप बी के 187 अधिकारियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में रही.

सरकार ने लोकसभा में जबरन रिटायरमेंट पर जवाब देते हुए कहा, लागू अनुशासनात्मक नियम के अनुसार सरकार के पास उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने का अधिकार है. सरकार को पूर्ण अधिकार है कि वह सार्वजनिक हित को देखते हुए सत्यनिष्ठा की कमी और लापरवाही दिखाने वाले अफसरों पर मौलिक नियमों के प्रावधान (एफआर) 56 (j) (i), केंद्रीय सिविल सर्विस के नियम 48, पेंशन नियम 1972 और सिविल सेवा नियम 16 (3) (संशोधित) के तहत कार्रवाई कर सकती है.ये नियम सरकार की सेवाओं की समय-समय पर समीक्षा और समय से पहले सेवानिवृत्ति की नीति निर्धारित करते हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल करते हुए 600 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई 200 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया था. वहीं, 400 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को बृहद दंड दिया गया था.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों से भ्रष्टाचार में लिप्त दोषी, अक्षम अधिकारियों और कर्मचारियों की रिपोर्ट तलब कर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे. उन्होंने समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए थे कि जो भी रिपोर्ट के आधार पर दोषी और अक्षम पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किया जाएगा.

Sources:-Zee News

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