चौंकाने वाली है वजह, घर बदलते ही नीतीश के साथ फिर क्यों आए हैं प्रशांत किशोर?

राजनीति

पटना: बिहार में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव के भी आसार हैं। नीतीश कुमार ने अपने चाणक्य के साथ चुनावी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार ने अपने रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पटना बुला लिया है और अब प्रशांत किशोर नीतीश कुमार के साथ ही सात सर्कुलर रोड में रह रहे हैं।

नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाते हैं। लेकिन बिहार की राजनीति के चक्रव्यूह की रचना के वक्त नीतीश अपने ‘सारथी’ प्रशांत किशोर को साथ रखना नहीं भूलते। प्रशांत किशोर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बुलावे पर पटना आ चुके हैं और उनका आशियाना सात सर्कुलर रोड है, जहां नीतीश कुमार स्वंय रहते हैं।

गौरतलब है कि 18 अप्रैल को ही नीतीश कुमार एक अण्णे मार्ग छोड़कर सात सर्कुलर रोड स्थित अपने सरकारी आवास में शिफ्ट हो चुके हैं। सात सर्कुलर रोड से ही नीतीश कुमार ने महागठबंधन को आकार दिया था और सत्ता में वापसी की थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि नीतीश कुमार सात सर्कुलर रोड को अपने लिए भाग्यशाली मानते हैं। लिहाजा वह चुनावी रणनीति उसी आवास से बनाना उचित समझते हैं।

बिहार की राजनीति में ऐसी मान्यता है कि एक अण्णे मार्ग में जो मुख्यमंत्री रह जाता है, उसकी वापसी नहीं होती इसके कई मिसाल हैं। लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और जीतनराम मांझी, इन नेताओं की मुख्यमंत्री के तौर पर वापसी नहीं हुई, लिहाजा नीतीश कुमार एक अण्णे मार्ग को लकी नहीं मानते।

पिछले दिनों 18 अप्रैल को नीतीश कुमार एक अण्णे मार्ग को छोड़कर सात सर्कुलर रोड स्थित अपने सरकारी आवास में शिफ्ट हो चुके हैं। इस आवास के निर्माण कार्य में हाल के दिनों में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। प्रशांत किशोर के पटना पहुंचते ही नीतीश अपने उसी आवास में वापस आ गए हैं, जहां से वह चुनावी रणनीति का आगाज करते हैं।

भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़कर भाजपा से गठबंधन किया था। राजनीति के जानकार बताते हैं कि नीतीश भाजपा के साथ भी सहज नहीं हैं। ऐसा इसलिए है कि बिहार को लेकर नीतीश कुमार की जो उम्मीद है मोदी सरकार से थी। वह पूरी नहीं हुई और नीतीश खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। लिहाजा नीतीश गैर भाजपा और गैर राजद गठबंधन बनाने की कोशिश में नेताओं से लगातार मुलाकात कर फेडरल फ्रंट की संभावनाओं पर विमर्श कर रहे हैं।

इसी क्रम में नीतीश कुमार रामविलास पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और पप्पू यादव जैसे नेताओं से मिलकर मंत्रणा कर चुके हैं। नीतीश और रामविलास पासवान की मुलाकात हाल के दिनों में 5 बार हो चुकी है।

पिछले विधानसभा चुनाव के एक साल पहले नीतीश कुमार ने अपने चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर को बुला लिया था और राजनीति को आकार देने का काम शुरू हो गया था। लोकसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले नीतीश कुमार ने अपने चाणक्य प्रशांत किशोर को वापस उसी घर में बुला लिया है, जहां से वह पिछली बार मुख्यमंत्री बने थे।

नीतीश अपने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ बिहार की राजनीति को लेकर गंभीर मंत्रणा में जुटे हैं। नीतीश खासतौर पर 2 मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। पहला तो यह कि क्या लोकसभा चुनाव के साथ बिहार विधानसभा का चुनाव कराया जा सकता है और दूसरा जदयू अगले चुनाव में किस गठबंधन के साथ वापसी करे, जिससे की पार्टी का जनाधार और मजबूत हो।

जानकारी के मुताबिक इस बात की संभावनाएं ज्यादा है कि लोकसभा चुनाव के साथ ही बिहार विधानसभा की चुनाव कराई जाए और ऐसी स्थिति में नीतीश भारतीय जनता पार्टी से सीटों का सौदा कर सकेंगे।

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