नीतीश की राह पर चलने को तैयार योगी और शिवराज

राजनीति

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देश को एक नई राह दिखाई है। एक साल पहले सूबे में लागू की गई शराबबंदी की सफलता से दूसरे राज्य भी प्रभावित हो रहे हैं।भाजपा शासित राज्यों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने शराबबंदी लागू करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। दरअसल बिहार में शराबबंदी पर नीतीश सरकार की दृढ़ नीति व सख्ती से सूबे की महिलाओं ने राहत की बड़ी सांस ली है। इसके बाद दूसरे राज्यों में भी इसका सकारात्मक संदेश गया है। अन्य राज्यों की महिलाएं भी शराबबंदी के लिए आंदोलन कर रही हैं। देश के दूसरे राज्यों में शराबबंदी की मांग को लेकर बढ़ रहे आंदोलन को नीतीश कुमार के बड़े प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है।

 

खबरों के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार ने वहां शराबबंदी की शुरूआत कर दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा इलाके में सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा के किनारे पांच किलोमीटर के दायरे की 58 शराब दुकाने बंद करवा दी हैं। उन्होंने घोषणा की है कि सूबे में चरणबद्ध ढंग से शराबबंदी लागू की जाएगी। दरअसल मध्य प्रदेश में कुछ महीनों से शराबबंदी के लिए उग्र आंदोलन चल रहा है। वहां के जनप्रतिनिधि भी शराबबंदी की मांग कर रहे हैं।
उधर, उत्तर प्रदेश में भी शराबबंदी की मांग को लेकर आंदोलन शुरू हो चुके हैं। कई कठोर घोषणाएं कर चुकी आदित्यनाथ योगी की सरकार के सामने शराबबंदी पर जल्द निर्णय लेने की चुनौती है। यूपी की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि एक सप्ताह के भीतर सरकार शराबबंदी के मुद्दे पर निर्णय ले लेगी। उन्होंने शराबबंदी के लिए महिलाओं के आंदोलन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शराब एक बड़ी समस्या है। इसने कई घरों को बर्बाद कर दिया है।
इस पर यह निर्णय लेते हुए महिलाओं की मांग का ध्यान रखेंगे। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा है कि शराबबंदी की मांग को लेकर महिलाओं द्वारा ठेकों पर हमले की घटनाओं की समीक्षा की जाएगी। उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद दूसरे राज्यों में शराबबंदी की मांग को नीतीश कुमार द्वारा देश को दिए गए बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर उनकी शराबबंदी देश में बड़ा प्रभाव छोड़ती है तो सभी राज्यों को इस पर निर्णय लेने को मजबूर होना पड़ेगा। इससे केंद्र सरकार पर भी दबाव पड़ेगा। यह नीतीश की राष्ट्रीय छवि गढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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