Patna: इनका नाम है मनोज ठाकुर झा। एक किसान के बेटे हैं। बिहार के मधुबनी जिले से नाता रखते हैं। सिविल सेवा परीक्षा में इन्होंने 54वीं रैंक हासिल की है। सबसे बड़ी बात है कि यह इनका पहला प्रयास था। बचपन से पढ़ाई में औसत रहे थे। फिर भी पढ़ाई लगातार जारी रखी। हर परीक्षा में ये प्रथम श्रेणी में पास हुए। सपना इन्होंने संजो रखा था आईएस बनने का बचपन से ही। तब ये प्राथमिक स्कूल में पढ़ रहे थे। जिज्ञासा थी हर चीज के बारे में जानने की। हर चीज के बारे में समझने की।

सरस्वती विद्या मंदिर से पढ़ाई

सरस्वती विद्या मंदिर से इनकी पढ़ाई हुई है। यह एक आवासीय विद्यालय था। फिर 12वीं की पढ़ाई के लिए असम के गोलपारा चले गए। दिल्ली विश्वविद्यालय से इंग्लिश ऑनर्स में उन्होंने अपना स्नातक पूरा किया। जूलॉजी में उनके पिता ने पोस्ट ग्रेजुएशन कर रखा था। वे जब सरकारी नौकरी की कोशिश करके थक गए और यह नहीं मिली, तो वे खेती के काम में लग गए थे।

एक साल की तैयारी

मुकुंद हालांकि चाहते थे कि उन्हें अपने इस सपने को हर हाल में पूरा करना है। इसलिए जब 2018 में ग्रेजुएशन पूरा कर लेने के बाद उनकी उम्र सिविल सेवा परीक्षा देने के लिए पूरी नहीं हुई थी, तो उन्होंने इसके लिए जमकर तैयारी की। साल 2019 में पहली बार वे प्रिलिम्स में शामिल हुए। किसी तरह की कोई कोचिंग उन्होंने इसके लिए नहीं ली थी। खुद से तैयारी की।

सोशल मीडिया से दूरी

नतीजा यह हुआ कि उन्होंने इसमें सफलता अर्जित कर ली। मुकुंद यही बताते हैं कि अपनी तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से उन्होंने खुद को पूरी तरह से दूर कर लिया था। पढ़ाई भी उनकी रोजाना 12 से 14 घंटे की हुआ करती थी। मुकुंद यही बताते हैं कि देश के बारे में आपकी जानकारी जिससे अच्छी तरह से पता चले, वैसे ही सवाल इंटरव्यू में यहां पूछे जाते हैं। इसलिए सिलेबस के मुताबिक तैयारी करना बहुत ही जरूरी होता है।

सीमित थे संसाधन

मुकुंद के पास संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। मुकुंद ने योजना बनाई। योजना के मुताबिक पढ़ाई की। लक्ष्य के प्रति समर्पण रहा। अंत में सफल भी हुए। आज हर किसी के लिए एक मिसाल बन गए हैं।

Source: Live Bihar

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