21 अप्रैल को मनाई जाएगी रामनवमी, सनातन परंपरा में महत्त्वपूर्ण माना जाता है चैत्र मास

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Patna: सनातन परंपरा में चैत्र का मास महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से भारतीय नववर्ष का आरम्भ होता है। 13 अप्रैल 2021 से यह नववर्ष विक्रम संवत् 2078 का शुभारंभ होने जा रहा है। इसी नववर्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के जन्म का पुनीत अवसर आता है। 21 अप्रैल को रामनवमी है। इस वर्ष चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि 29 मार्च से ही आरंभ है। धर्माय़ण के हर अंक की तरह चैत्र 2078 श्रीरामजन्म विशेषांक का लोकार्पण 28 मार्च पूर्णिमा के शुभ अवसर में हुआ। इस पत्रिका का ई-संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है। यह महावीर मन्दिर की वेबसाइट पर निःशुल्क पढ़ी जा सकती है और डाउनलोड की जा सकती है।

धर्मायण पत्रिका के इस रामनवमी विशेषांक में श्रीराम से संबंधित कुल नौ आलेख हैं। इसमें रामजन्म के अवसर के बधैया गीत रामजनम बधाई विशेष रूप से प्रकाशित किए गए हैं। ये प्राचीन गीत सन्त कवि जानकी दास द्वारा रचित है, जिनकी पाण्डुलिपि से पहली बार प्रकाशन किया गया है। इसके बाद दक्षिण भारत में प्रचलित श्रीरामपट्टाभिषेकविधि का भी प्रथम बार पाण्डुलिपि से सम्पादन ओडीशा की विदुषी डॉ. ममता मिश्र दास ने किया है। अहमदाबाद के डॉ. वसन्तकुमार भट्ट ने अपने आलेख में इसकी ऐतिहासिकता पर विदेशियों के द्वारा लगाए गए आक्षेपों का खंडन किया है।

एक अन्य लेख वैष्णव चिह्नों की परंपरा और सन्त पीपाजी में डॉ. श्रीकृष्ण ने वैष्णवों को कहां कौन-सा चिह्न धारण करना चाहिए, इसका विवरण दिया है। मिथिला में श्रीराम की पूजा भगवान् शिव के साथ होती रही है। तीन ऐसे पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं, जिनमें शिवलिंग पर श्रीराम की पूजा करने का विधान किया गया है। इन विषय पर मूर्ति विज्ञानी डॉ. सुशान्त कुमार का आलेख चित्रों के साथ संकलित है। श्रद्धालुओं और साधकों के लिए रामनाम लेखन की शास्त्रीय विधि एक आलेख में श्रीरामनामलेखन की विधि अंकुर पंकज कुमार जोशी ने लिखा है।

एक आलेख में श्रवण कुमार का वास्तविक नाम यज्ञदत्त था, यह प्रमाण के साथ डॉ. काशीनाथ मिश्र ने अपने आलेख में लिखा है। दिल्ली के डॉ. लक्ष्मीकान्त विमल मैथिल महाकवि रूपनाथ उपाध्याय प्रणीत श्रीराम विजय महाकाव्य का परिचयात्मक आलेख लिखा है। सांस्कृतिक समन्वय के युगप्रतीक- श्रीराम आलेख में महेश प्रसाद पाठक ने स्पष्ट किया है कि बृहत्तर भारत को एकीकृत करने में श्रीराम के समन्वय दृष्टि का योगदान रहा है। आचार्य सीताराम चतुर्वेदी ने लिखित हनुमन्नाटक की रामकथा इस अंक का एक आकर्षण है। सूर्य सिद्धान्त का काल एवं शुद्धता में अरुण कुमार उपाध्याय ने भी आलेख लिखा है।

Source: Daily Bihar

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