ram chandra singh

नितिश कुमार ने राम चंद्र प्रसाद सिंह नाम पर जताई सहमति…

जनसत्ता एवं वन इंडिया समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के अनुसार बिहार के राम चंद्र प्रसाद सिंह हो सकते हैं भारत सरकार के नये रेल मंत्री ! लगातार रेल दुर्घटनाओं के चलते रेल मंत्रालय में सुरेश प्रभु का पद जाना लगभग तय हो गया है! मोदी सरकार के 16 महीने बचे हैं उससे पहले एक बार मंत्रिमंडल का फेरबदल होना तय हुआ है जिसमें नए सहयोगी बने जनता दल यूनाइटेड के दो सांसदों को मंत्री बनाया जाना है ! सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्रालय जनता दल यूनाइटेड के झोली में जा सकता है क्योंकि नीतीश कुमार पहले कामयाब रेल मंत्री रह चुके हैं, और उनका पसंदीदा राज्यसभा के सदस्य राम चंद्र प्रसाद सिंह हैं ! जब नीतीश कुमार भारत के रेलमंत्री हुआ करते थे उस समय श्री सिंह भी उसके साथ काम कर रहे थे !

कौन हैं राम चंद्र प्रसाद सिंह ?

मौजूदा समय में राम चंद्र प्रसाद सिंह बिहार से राज्यसभा, संसद सदस्य हैं! नाम है रामचंद्र प्रसाद सिंह. दो दशक से ज्यादा हो रहे हैं इस आदमी को बिहार की नीति- रीति तय करते हुए. दो दशक से ज्यादा हो रहे हैं बिहार में जेडीयू और नीतीश कुमार को संभालते हुए. जेडीयू की तरफ से एक बार फिर से राज्यसभा सांसद चुने गए हैं रामचंद्र प्रसाद सिंह.

रामचंद्र प्रसाद को शॉर्ट में RCP कहते हैं. जेडीयू के लिए चुनावों में स्ट्रेटजी तय करना, स्टेट की ब्यूरोक्रेसी को कंट्रोल करना, माने उनकी पोस्टिंग-ट्रांसफर वगैरह डिसाइड करना, सरकार की नीतियां बनाना और उनको लागू करने का A2Z जिम्मा इनका है. जेडीयू में नंबर दो की हैसियत रखने वाले और नीतीश कुमार के दिमाग(दाहिने हाथ नहीं) के बारे में कुछ और जानते हैं.


शुरुआती पढ़ाई, शादी और सर्विस

मुस्तफापुर, नालंदा में रहते थे दुक्खालालो देवी और सुखदेव नारायण सिंह. उन्हीं के घर पैदा हुए रामचंद्र प्रसाद. साल था 1958, तारीख 6 जुलाई. जाति बिरादरी नीतीश कुमार वाली ही है. अवधिया कुर्मी. जाति की बात करना यहां इसलिए जरूरी है कि इंडियन पॉलिटिक्स अभी काफी हद तक जाति से ही तय होती है. खास तौर से यूपी बिहार की.

रामचंद्र की शुरुआती पढ़ाई नालंदा में ही हुई. हुसैनपुर, नालंदा के सरकारी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा करने के बाद पटना साइंस कॉलेज पढ़ने के लिए आ गए थे ! इतिहास से ग्रेजुएशन किया, पटना यूनिवर्सिटी से. इसी दौरान 21 मई सन 1982 को गिरिजा देवी से शादी हो गई. एक नई जिम्मेदारी ओढ़ ली घर गृहस्थी की.

उन्होंने एक उच्च शिक्षा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से हासिल किया था ! श्री सिंह का रुचि खेती, खेलकूद एवं समाजिक कार्यों में शुरू से रहा था ! IAS का परीक्षा में अच्छे रैंक लाने के बाद उसे पहली बार 1986-88 उप-विभागीय अधिकारी/ मजिस्ट्रेट, खलीललाबाद, उत्तर प्रदेश पोस्टिंग मिला था !

खैर जेएनयू की कहानी सुनाने बैठ जाएंगे तो बोर हो जाओगे. अभी तो RCP पर ही बातों की रेल चलने दो. तो जेएनयू से एक्सटर्नल अफेयर स्टडी में MA करने के बाद 1984 में सिविल सर्विस ज्वाइन की. जी हां, रामचंद्र यूपी कैडर के IAS हैं. ये वो दौर था जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश बड़ी राजनैतिक उठापटक से जूझ रहा था. इसी गरम माहौल में इनकी सरकारी सर्विस शुरू हुई.

उत्तर प्रदेश सरकार के शासन में साल 1997 तक काम किया. 1993 से 97 तक कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रहे. रामपुर, बाराबंकी, हमीरपुर औऱ फतेहपुर ट्रांसफर होता रहा.

पॉलिटिक्स में एंट्री

ये पॉलिटिक्स का अटल बिहारी काल था. हमारी उम्र के लड़के पापा से छोटी साइकिल लेने की जिद किया करते थे. टीवी पर शक्तिमान शुरू हो चुका था. सन 1998-99 में NDA की सरकार थी और अटल बिहारी बाजपेई प्रधानमंत्री थे. उनकी कैबिनेट में नीतीश कुमार को पहले रेल और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय मिला. फिर कृषि मंत्रालय. नीतीश मंत्री थे, रामचंद्र उनके पर्सनल सेक्रेट्री. उसी दौरान रामचंद्र और नीतीश करीब आए. दोनों ने एकदूसरे को समझा. फिर एक ऐसा अनकहा रिश्ता बना जिसमें दोनों ने अपने रोल चुन लिए. जिन पर अब तक दोनों कायम हैं और RCP बिना सामने आए नीतीश की फैमिली से लेकर चुनाव, सरकार और ब्यूरोक्रेसी सब संभालते हैं.
नीतीश कुमार से हमेशा इनकी बनती रही. इनके काम से खुश नीतीश ने इनको पार्टी की तरफ से पहली बार राज्यसभा में भेजा सन 2010 में. इस बार फिर सांसद चुनने का नंबर आया तो इनको आगे कर दिया. कहते हैं इनको नीतीश के साथ वैसे ही देखा जाता है जैसे इंदिरा गांधी के साथ आरके धवन को देखा जाता था.
बहुत सीधा सादा रहन सहन है. सांसद बनने के लिए जिस एफिडेविट में संपत्ति का ब्योरा देखोगे तब पता चलेगा. पता है कॉमेडियन कपिल शर्मा टीवी इंडस्ट्री में आने पर पहले साल इतना कमा लेता है कि 50 लाख की रेंज रोवर कार से घूमता है. छोटे छोटे थानों के दारोगा भी 20-30 साल की सर्विस में करोड़ों बना लेते हैं. किसी पार्टी के छुटभैये नेता से साठ गांठ हो तो बात ही क्या. रामचंद्र न जो कागजात पेश किए हैं उसके हिसाब से उनकी कुल चल-अचल संपत्ति मिलाकर कीमत होती है दो करोड़ 38 लाख रुपए.

लाइफ स्टाइल बेशक सादा है लेकिन ब्यूरोक्रेसी के दांव पेच खूब समझते हैं. घाट घाट का पानी पिए हैं यूपी में सर्विस करते हुए. वो सारा इकट्ठा किया एक्सपीरिएंस अब सरकार चलाने के काम आता है.

अभी बिहार में शराब बैन है. क्या लगता है, किसके बस का काम था ये? नशे में मानो पंजाब जैसा तो नहीं डूबा बिहार लेकिन फिर देसी और कच्ची दारू में शायद ये पंजाब से आगे हो. इस स्टेट में शराबबंदी के लिए जिस सख्ती की जरूरत थी उसमें जरा सी भी कमी नहीं की रामचंद्र प्रसाद ने.

 रेल मंत्री बनने का कितना चांस है

27 अगस्त 2017 पटना के महा रैली में श्री लालू प्रसाद यादव ने भी श्री सिंह का नाम लिया था और उन्होंने कहा था कोई आरसीपी है जो मोदी सरकार में मंत्री बनने वाले हैं ! श्री सिंह को रेलमंत्री बनाने की पीछे की राजनीति यह भी हो सकती है कि लालू प्रसाद जब रेल मंत्री थे उसके खामियों को श्री सिंह उजागर करें ! नितीश कुमार का मुख्यमंत्री रहते, श्री सिंह मुख्यमंत्री मुख्य सचिव 5 सालों तक रह रहे थे और जब नितीश कुमार रेल मंत्री हुआ करते थे उस समय भी श्री सिंह रेल मंत्रालय में थे ! श्री सिंह नालंदा से हैं और वह नितिश कुमार के जाति से हैं !

बीजेपी पार्टी को भी समझ में आ गया है कि बिहार से बने रेलमंत्री ज्यादा कामयाब रहे हैं इसीलिए यह मंत्रालय किसी बिहारी को सौंपा जाए!

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