राजस्व गांवों के खतियान और नक्शा का अंतिम प्रकाशन शुरू, साल के अंत तक पहले चरण का सर्वे होगा पूरा

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विशेष भूमि सर्वेक्षण वाले राजस्व गांवों के खतियान और नक्शा का अंतिम प्रकाशन शुरू हो गया है। यानी इन गांवों का भूमि सर्वेक्षण निर्विवाद हो गया। रैयतों की शिकायतों का निबटारा हो गया। इस खतियान और नक्शा के आधार पर चकबंदी हो सकती है। विभाग का दावा है कि जल्द ही अन्य राजस्व गांवों के खतियान और नक्शा का अंतिम प्रकाशन होगा। राज्य में दो चरणों में भूमि सर्वेक्षण चल रहा है। पहले चरण के 20 जिलों में भूमि सर्वेक्षण अंतिम दौर में है। इन जिलों में जमीन पर काम लगभग पूरा हो गया है। मानसून के समय जमीन पर काम नहीं होगा। जुटाए गए आंकड़ों का मिलान और इस आधार पर दस्तावेज तैयार होगा। साल के अंत तक पहले  चरण के गांवों में भूमि सर्वेक्षण पूरा हो जाएगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा के मुताबिक हवाई फोटोग्राफी और जमीनी सत्यापन की मिली जुली तकनीक से राजस्व नक्शे का निर्माण हो रहा है। हवाई तकनीक के माध्यम से कम समय में बड़े भू-भाग का नक्शा तैयार हो रहा है। इस तकनीक से जमीन पर अतिक्रमण के मामले भी आसानी से चिह्नित हो रहे हैं। इस तकनीक से प्रथम चरण वाले 20 जिलों के 5019 गांवों का राजस्व नक्शा बनाने की प्रक्रिया चल रही है। 2584 गांवों में किस्तवार की प्रक्रिया पूरी हो

चुकी है। इन गांवों का डाटा भी भू सर्वेक्षण साफ्टवेयर में दर्ज किया जा चुका है। जून के पहले सप्ताह में संविदा कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। समय पर वेतन का भुगतान मुख्य मुद्दा था। राज्य कैबिनेट से आवंटन की मंजूरी मिलने के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संविदाकर्मियों की मांग नौकरी के स्थायीकरण की भी है। इसे राज्य सरकार के विचार के लिए भेज दिया गया है। हड़ताल समाप्त होने के बाद सर्वे में तेजी आई है।

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