वट सावित्री व्रत: क्या हैं इससे जुड़ी मान्यता, महत्व और पूजन का तरीका…

आस्था

आज वट सावित्री व्रत है।  वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं….।
यह व्रत हमे हमारी संस्कृति और स्त्री की शक्ति को उजागर करता है, एक तरफ जहां यह पर्व आस्था का प्रतीक है, वही दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सती सावित्री से आज के दिन का सम्बन्ध है। महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा के लिये आज वट वृक्ष का पूजन करती हैं।

हर हर महादेव ! 🚩🚩🙏

वट सावित्री व्रत में इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. इस साल संयोग ऐसा बना है कि इसी दिन शनि जयंती व स्नान, दान अमावस्या भी पड़ रहे हैं.

मान्यताएं
वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा करती हैं. कहते हैं कि गुरुवार को वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है. ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था. इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं

और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही सुहागन को जल ग्रहण करना चाहिए.

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