राष्ट्रपति का संबोधन : चंपारण में बापू ने चलाया था स्वच्छता अभियान, देश को दिया अहिंसा का मंत्र

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भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 72वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने अपने संबोधन में गांधीजी के उस महामंत्र को याद किया, जिसमें बापू ने अहिंसा का पाठ लोगों को पढ़ाया था. राष्ट्रपति ने कहा कि लोग हिंसा में उलझें और गांधीजी के अहिंसा पथ पर चलें. उन्होंने कहा कि गांधीजी के स्वच्छता अभियान को भी लोग नहीं भूलें. गांधीजी ने बिहार के चंपारण समेत देश के कई हिस्सों में स्वच्छता अभियान चलाया. संबोधन में उन्होंने पूरे देश को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई दी तथा लोगों के स्वर्णिम भविष्य की कामना की. बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का यह दूसरा संदेश था.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि एकजुट होकर हम अपने वनों और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण कर सकते हैं, हम अपने ग्रामीण और शहरी पर्यावास को नया जीवन दे सकते हैं. हम सब ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता को दूर कर सकते हैं. हमारा भारत केवल सरकार का नहीं, बल्कि यहां के लोगों का भी है. उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त कर लेना ही नहीं है, बल्कि सभी के जीवन को बेहतर बनाने की भावना को जगाना भी है. ऐसी भावना से ही संवेदनशीलता और बंधुता को बढ़ावा मिलता है.

उन्होंने कहा कि इस स्वाधीनता दिवस के अवसर पर हम सब भारतवासी अपने दिन-प्रतिदिन के आचरण में गांधीजी द्वारा सुझाए गए रास्तों पर चलने का संकल्प लें. गांधीजी का महानतम संदेश यही था कि हिंसा की अपेक्षा. अहिंसा में शक्ति है. अहिंसा की शक्ति सबसे अधिक है. समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है. गांधीजी ने अहिंसा का यह अमोघ अस्त्र हमें प्रदान किया है. गांधीजी ने बिहार के चंपारण समेत पूरे देश में स्वच्छता अभियान का नेतृत्व किया. हमें गांधीजी के विचारों को गहराई से समझने का प्रयास करना होगा.

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मैं विश्व के जिस देश में गया, वहां गांधीजी को मूर्तिमान के रूप में देखा. विश्व में हर जगह सम्पूर्ण मानवता के आदर्श के रूप में गांधीजी को सम्मान के साथ याद किया जाता है. इस बार स्वाधीनता दिवस के साथ एक खास बात जुड़ी हुई है. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर 2 अक्टूबर से पूरे देश में समारोह शुरू होगा. आज हम अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जो अपने आप में बहुत अलग है. आज हम कई ऐसे लक्ष्यों के काफी क़रीब हैं, जिनके लिए हम वर्षों से प्रयास करते आ रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी स्वाधीनता का दायरा काफी बड़ा है. हमें स्वाधीनता को विकास के नए आयाम देना है. देश के सैनिक और किसान हमारे लिए अहम योगदान देते हैं. सैनिक कठिन हालात में देश की आजादी की रक्षा कर रहे हैं. सरकार किसानों और सैनिकों के साथ हर वर्ग के लिए काम कर रही है. महिलाओं को आजादी की भी सार्थकता है. उन्हें घरों में अपने स्वतंत्रता का अवसर मिलना चाहिए. उन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में आजादी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास शहीदों को एक श्रद्धांजलि होगी.

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