IPS विकास वैभव बिहार ही नहीं देश भर में फेमस हैं, जानिए क्यों..

एक बिहारी सब पर भारी खबरें बिहार की

आप उन्हें ऐतिहासिक विरासत को सहेजने वाला गंभीर चिंतक कह सकते हैं। आप उन्हें पौराणिक, महाभारतकालीन तीर्थस्थलों पर गंभीरता से शोध करने वाला शोधार्थी भी कह सकते हैं।

आप उन्हें एक ऐसा पुलिस अधिकारी कह सकते हैं, जिनके शोधपरक ब्लॉग साइलेंट पेजेज ऑफ इंडिया को विदेशों में ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ते हैं। साथ ही, उन्हें एक कर्तव्यपरायण और संवेदनशील पुलिस अधिकारी भी कह सकते हैं, जिनका लक्ष्य आम लोगों को स्मार्ट पुलिसिंग के जरिये त्वरित इंसाफ दिलाना है।

जी हां,बात बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और समग्र व्यक्तित्व के धनी, भागलपुर रेंज के डीआइजी विकास वैभव की हो रही है। इन दिनों भागलपुर में स्मार्ट पुलिसिंग के जरिये वह आम लोगों को त्वरित न्याय दिला रहे हैं।

आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि गत 12 महीनों में पूरे राष्ट्र स्तर पर विकास वैभव, अन्य आइपीएस अधिकारियों की तुलना में सबसे ज्यादा पॉपुलर रहे।

गूगल ट्रेंडस के मुताबिक मनोरंजन, कानून व्यवस्था, राजनीति, अर्थव्यवस्था के साथ सभी कटेगरी में लोगों ने विकास वैभव को सबसे ज्यादा पसंद किया है। अन्य आइपीएस अधिकारियों की तुलना में उन्हें ज्यादा सर्च किया गया है।

भागलपुर डीआइजी बनने के तुरंत बाद लापरवाह आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के बाद त्वरित एक्शन में आये विकास वैभव के प्रयास से इलाके में क्राइम के ग्राफ में लगातार कमी आयी है।




पुलिस थाने में लोगों की समस्याएं सुनी जा रही हैं। लोग पुलिस वालों के साथ बैठकर अपनी समस्याओं का निबटारा कर रहे हैं। कल तक वर्दी और थाने के नाम से सहम जाने वाले लोग स्मार्ट पुलिसिंग के संवाद केंद्र में अपनी बातें खुलकर रख रहे हैं। भागलपुर शहर के युवाओं में एक अलग उत्साह है।

रविवार को भागलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में युवाओं ने विकास वैभव से सक्सेस टिप्स जाना। भारी संख्या में कार्यक्रम में आये छात्र-छात्राओं से उन्होंने एक सुलझे हुए मेंटर की तरह बातचीत की और उनके कैरियर को नयी ऊंचाई देने के लिए बहुत सारे टिप्स दिये। भागलपुर के समाजसेवी मानते हैं कि जिस तरह की पुलिसिंग का सपना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देखते हैं। ठीक उसी तरह की स्मार्ट पुलिसिंग इन दिनों भागलपुर में दिख रही है।



गूगल ट्रेंडस के मुताबिक 24 जुलाई 2016 से 31 जुलाई 2016 को डीआइजी विकास वैभव को 44 फीसदी लोगों ने सर्च किया। वहीं 25 सितंबर से 01 अक्तूबर के बीच 91 फीसदी लोगों ने सर्च किया। 20 नवंबर से 26 नवंबर तक उन्हें 50 फीसदी लोगों ने सर्च किया, जबकि इस दौरान अन्य आइपीएस अधिकारियों का आंकड़ा काफी नीचे रहा।

विकास वैभव की पॉपुलरिटी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 26 मार्च 2017 से एक अप्रैल 2017 को 100 फीसदी लोगों ने सर्च किया। गत एक सप्ताह के आंकड़े को देखें तो उन्हें दो जुलाई को सबसे ज्यादा लोगों ने सर्च किया है।



वहीं गूगल लैब्स के ट्रेंड्स रिपोर्ट के मुताबिक मात्र एक दिन के आंकड़े को देखें तो तीन जुलाई को भी अन्य आइपीएस अधिकारियों की तुलना में लोगों ने विकास वैभव को ज्यादा पसंद किया है।
लोगों ने ‘की’ वर्ड के रूप में सबसे ज्यादा विकास वैभव आइपीएस, विकास वैभव, विकिपीडिया, बॉयोग्राफी सर्च किया है। विकास वैभव आइपीएस ‘की’ वर्ड टाइप करने पर, गूगल मात्र 29 सेकेंड में 49 हजार रिजल्ट देता है। आम लोगों की मानें तो बिहार में कार्यरत एक आइपीएस अधिकारी का राष्ट्र स्तर पर इस तरह से पॉपुलर होना गर्व की बात है।

शायद इसलिए विकास वैभव, युवाओं के लिए आयोजित सार्वजनिक सभा में अपने बचपन के दिनों में स्कूल में गाए जाने वाली प्रार्थना का हमेशा जिक्र कहते हं और कहते हैं कि इन्हीं पंक्तियों ने उन्हें हमेशा संघर्षरत रहने के प्रेरित किया।



वह कहते हैं- काम शुरू करते नहीं भय से नीचे लोग, मध्यम त्यजते बीच में देख विषम संयोग, पर उत्तम वे लोग जो हर दुर्गम पथ झेल, ढृढता से बढ़ते सतत बाधाओं को ठेल।

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