पूजा-अर्चना:उत्तरवाहिनी गंगा तट को माना जाता है पापहरणि और मोक्षदायनी

आस्था

Patna: सोमवार को सीमांचल के सहरसा, मधेपुरा, सुपौल पूर्णिया, बिहारी गंज, रूपौली, भवानीपुर, समेली तथा कुरसेला के हजारों श्रद्धालु ऑटो तथा बाइक से आकर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कुरसेला गंगा के तीनमोहनी संगम तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर शरीर मन एवं हृदय को निर्मल किया । मान्यता है कि गंगा में एक बार डुबकी लगाने के बाद पूर्व जन्म के पाप के साथ अपने वर्तमान जीवन में किए गए कुकर्म का नाश होता है।

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान को लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ से बाजारों में भी अधिक चहल-पहल देखी गई गंगा स्नान कर दोपहर बाद श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला शुरू हो गया । बताते चलें कि कुरसेला में स्थित तीनमोहनी गंगा वेद ग्रंथो में वर्णित संगम उत्तरवाहिन गंगा तट पापहरणि तथा मोक्षदायनी माना जाता है। ऐसे स्थलों पर जप तप , ध्यान , साधना, गंगा सेवन और स्नान विशेष रूप से फलित समझा जाता है । भारत वर्ष में ऋषिकेश, हरिद्वार , प्रयाग, काशी सुल्तानगंज व कुरसेला का त्रिमोहनी संगम उत्तर वाहनी गंगा तटों के अनुरूप कुरसेला के संगम उत्तरवाहिनी तट को महत्ता की प्रसिद्धि नहीं मिल पायी है।

कोसी व कलवलिया नदी की धारा तीन नदियों का है संगम स्थल
कोसी नदी और कलवलिया नदी की धारायें यहां गंगा नदी से संगम करती है। यहां गंगा नदी दक्षिण से उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है। सूर्योदय की किरणें सीधे गंगा के लहरों पर पड़ती है। जिससे प्रकृति का अनुपम दृश्य देखने को मिलता है। नेपाल से निकलने वाली कोसी के सप्तधाराओं में एक सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों से गुजरते हुए यहां आकर गंगा नदी से संगम कर अपना वजूद खो देती है। कलवलिया नदी की एक छोटी धारा इस उत्तरवाहिनी गंगा तट से मिलकर संगम करती है। पहाड़ों के बीच बाबा बटेशवरनाथ का प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर है।

हरिकिर्तन का भी आयोजन
गंगा व कोसी के संगम तट पर कुरसेला प्रखंड के पश्चिमी मुरादपुर पंचायत की सरपंच संगीता देवी तथा समाजसेवी सुरेंद्र मंडल के द्वारा संगम तट पर राधा -कृष्ण ,शिव -पार्वती ,गंगा मैया की प्रतिमा स्थापित कर 48 घंटे का अष्टयाम हरिकीर्तन का आयोजन किया गया है । आयोजक द्वारा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारा का आयोजन किया गया। समाजसेवी सुरेंद्र मंडल ने बताया कि विगत 6 वर्षों से कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा और कोसी संगम तट पर कुर्सेला परीक्षेत्र में शांति, समृद्धि ,खुशहाली तथा भाईचारा बनाए रखने के लिए अष्टयाम हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता है । इस पुनीत कार्य में विंदेश्वरी बाबा, बुलाकी बाबा, लालधारी मंडल ,वकील मंडल अखिलेश मंडल ,राम सेवक मंडल, प्रमोद मंडल ,मनोज राम ,हरदेव मंडल ,हीरा लाल दास आदि लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

Source: Dainik Bhaskar

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