पुलिस ने की सख्ती, सत्ता बदलते ही माफियाओं की निकली हेकड़ी

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सब कुछ जानते हुए भी कभी-कभी पुलिस को खामोश रहना पड़ता है। नाक के नीचे अवैध काम चलते हैं और पुलिस आंख बंद रखती है। ऐसा खास कर तब होता है, जब सत्ता में शामिल लोग पुलिस के काम में दखल देते हैं या फिर अपराधियों, माफियाओं को संरक्षण देते हैं।

सूबे में बालू खनन को लेकर भी ऐसे ही हालत बने हुए थे, लेकिन अब सत्ता बदली तो पुलिस की चाल भी बदल गयी है। रविवार को पटना, आरा और छपरा की संयुक्त कार्रवाई में बिहटा, मनेर के इलाकों में बड़ी कार्रवाई की गयी। जेसीबी, पोकलेन जब्त किये गये हैं और 30 से ज्यादा लोग हिरासत में लिये गये हैं।

बालू खनन कराने में एक विधायक का नाम पहले भी चर्चा में रहा है और रविवार की कार्रवाई के दौरान भी नाम सामने आ रहा है। पुलिस का अनुसंधान जारी है। आइजी के एनएच खान के निर्देश पर पटना जोन में बालू खनन माफियाओं के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।





एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में टीम बनायी गयी है, जो बालू घाट पर धर-पकड़ करेगी। वहीं, फरार चल रहे बालू माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए भी छापेमारी शुरू कर दी गयी है।

मनेर, बिहटा समेत अन्य अवैध खनन वाले इलाके में अब पुलिस की नजर है। एक तरह से नाकेबंदी कर दी गयी है। बेसब्री से बालू माफियाओं की तलाश जारी है।

क्योंकि, बालू के दलदल में उलझी दो जिलों की फोर्स को अब तक फरार चल रहा फौजिया हाथ नहीं लगा है। फौजिया के पास एके – 47 है। इसलिए पुलिस भी पूरी तैयारी से उसकी तलाश कर रही है। फौज का भगोड़ा यह बालू माफिया इतनी आसानी से पुलिस के हाथ नहीं आयेगा।

यकीनन वह पुलिस के सामने बड़ा मोरचा भी ले सकता है। उसके गैंग में 30-40 नये अपराधी हैं, जो आधुनिक असलहे से लैस हैं। फिलहाल पुलिस का अभियान जारी है।
अपराधियों पर निगरानी का सिस्टम कमजोर है। यहां बता दें कि वर्ष 2014 में एसएसपी मनु महाराज की टीम ने दियारे में जाकर फौजिया को पकड़ा था। उसके साथ निपेंद्र समेत कुल नौ लोग पकड़े गये थे।





एके – 47 समेत भारी संख्या में असलहे पकड़े गये थे। लेकिन, गिरफ्तारी के बाद जब फौजिया जेल चला गया, तो पुलिस ने उस पर से नजर हटा ली। वह कब जमानत पर बाहर आया और कब से दोबारा बालू घाट पर सक्रिय हो गया, पुलिस को भनक तक नहीं लगी। उस पर निगरानी नहीं रखी गयी। नतीजा यह हुआ कि फौजिया ने नया गैंग खड़ा कर लिया।
31 जुलाई, 2016 को मनेर व कोइलवर के बीच सुअरमरवां, चौरासी दियारा बालू घाट के पास अवैध बालू खनन पर कब्जा को लेकर गोलियों चलीं थीं। शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजिया और मुखिया उमाशंकर उर्फ सिपाही के गुटों के बीच एके – 47 से चार घंटे तक लगातार गोलीबारी हुई थी।





बाद में पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों ही गुटों के लोग वहां से अपने हथियार के साथ भाग गये। गोलीबारी में फौजिया गुट के मुंशी प्रमोद पांडेय (45 वर्षीय) की गोली लगने से मौत हो गयी थी और मुखिया उमाशंकर उर्फ सिपाही गुट के मुंशी आनंदपुर निवासी हरेंद्र सिंह व ब्यापुर जीवराखन टोला के शिवमूरत राय घायल हो गये थे।

दोनों के पैर में गोली लगी थी। पुलिस ने प्रमोद पांडेय के शव के पास से एके – 47 के दर्जनों कारतूस व खोखे बरामद किये थे। दोनों पक्षों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

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